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कन्फ्यूज पार्टी कहने वाले कन्हैया कुमार को सीपीआई ने दिया इनाम, मिली राष्ट्रीय परिषद में जगह

एस. सुधाकर रेड्डी को भाकपा का महासचिव चुना गया है। जेएनयू के पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार को राष्ट्रीय परिषद में जगह मिली है।

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Kanhaiya

कोल्लमः जेएनयू के पूर्व छात्र कन्हैया कुमार ने शनिवार को जिस पार्टी को ‘कन्फ्यूज पार्टी’ कहा था उसी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय परिषद में जगह दी है। यह परिषद राजनीतिक मामले की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई है। केरल के कोल्लम में पार्टी की 23वीं कांग्रेस में कन्हैया कुमार को राष्ट्रीय परिषद का सदस्य चुना गया। इस परिषद में 125 सदस्य होते हैं। अभी कल यानी 28 अप्रैल को कन्हैया कुमार ने कहा था कि कांग्रेस को समर्थन देने पर फोकस करने की बजाय भाकपा को खुद को मजबूत करना चाहिए। लेकिन यह सीपीआई कन्फ्यूज पार्टी ऑफ इंडिया बन गई है। कन्हैया के इस बयान के एक दिन बाद भाकपा ने उन्हें यह सम्मानित पद देकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।

लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं कन्हैया
साल 2016 में जेएनयू विवाद के बाद सुर्खियों में कन्हैया कुमार अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इससे पहले कन्हैया ने संकेत दिया था कि वह बिहार के बेगूसराय सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। माना जाता है कि इस जिले में सीपीआई के काफी समर्थक रहते हैं। कन्हैया कुमार भी इसी जिले के रहने वाले हैं। जिसका लाभ सीपीआई को मिल सकता है।

एस. सुधाकर रेड्डी चुने गए महासचिव
एस. सुधाकर रेड्डी को रविवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) का लगातार तीसरी बार महासचिव चुना गया। उन्हें सर्वसम्मति से इस पद के लिए चुना गया। दो बार लोकसभा के सदस्य रह चुके रेड्डी पहली बार 2012 में भाकपा महासचिव बने थे। रेड्डी (76) तो बिना किसी विरोध के फिर से चुन लिए गए, लेकिन भाकपा की शीर्ष निर्णय लेने वाली इकाई में केरल से 15 सदस्यों के चयन में वरिष्ठ सदस्य सी. दिवाकरन नाम सूची में शामिल नहीं किए जाने से कुछ अवरोध नजर आया। भाकपा की राज्य इकाई, पार्टी सचिव कनम राजेंद्रन और वरिष्ठ नेता के. ई. इस्माइल के धड़ों के बीच बंटी हुई है। राष्ट्रीय परिषद में रविवार को छह नए सदस्यों को शामिल किया गया, यह सभी राजेंद्रन के प्रति निष्ठा रखने वाले माने जाते हैं।