DK Shivakumar Throws Rs. 500 Notes In Rally: कर्नाटक चुनाव की तारीख की घोषणा हो चुकी है। पर इससे पहले राज्य राज्य काँग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने आयोजित रैली में कुछ ऐसा कर दिया है जो एक चुनावी मुद्दा बन सकता है। साथ ही विवाद का आधार भी।
भारत के चुनाव आयोग (Election Commission Of India) ने आज कर्नाटक (Karnataka) में होने वाले 2023 विधानसभा चुनाव (2023 Assembly Election) की तारीख की घोषणा कर दी है। कर्नाटक में 10 मई को वोट डाले जाएंगे और 13 मई को उनकी गिनती होगी और नतीजे सामने आएंगे।। पर चुनाव आयोग के कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा करने से एक दिन पहले राज्य काँग्रेस (Congress) अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) ने कुछ ऐसा कर दिया, जिसका बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। और विवाद का आधार भी।
बरसाएं 500 रुपये के नोट
कर्नाटक काँग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने 28 मार्च को राज्य में एक रोड शो किया। यह रोड शो मांडया (Mandya) जिले के बेविनाहली (Bevinahalli ) में किया। इसमें कर्नाटक काँग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार एक बस पर पार्टी के कुछ अन्य सदस्यों के साथ नज़र आएं। यह रोड शो राज्य में चुनावी प्रचार के लिए श्रीरंगपट्टण (Srirangapatna) से शुरू की गई 'प्रजा ध्वनि यात्रा' के दौरान हुआ। पर इस दौरान डीके शिवकुमार ने कुछ ऐसा किया जिसका बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। इस रोड शो के दौरान डीके शिवकुमार ने वहाँ मौजूद लोगों पर बस से 500 रुपये के नोट बरसाएं।
कैसे बन सकता है चुनावी मुद्दा?
चुनाव आयोग के कर्नाटक में विधानसभा चुनाव 2023 की तारीख की घोषणा करने से एक दिन पहले कर्नाटक काँग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार का रोड शो के दौरान बस से 500 रुपये के नोट बरसाना बीजेपी के लिए एक चुनावी मुद्दा बन सकता है। काँग्रेस मौके-मौके पर बीजेपी पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ती। ऐसे में चुनावी तारीख की घोषणा से एक दिन पहले कर्नाटक काँग्रेस अध्यक्ष का इस तरह एक रोड शो के दौरान 500 रुपये के नोट बरसाने पर बीजेपी निशाना साध सकती है और चुनाव से पहले वोट बैंक बढ़ाने के लिए इसे काँग्रेस का राजनीतिक कदम बताकर उन्हें घेर सकती है।
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2018 में करोड़ों की नकदी, जेवरात और दूसरा कीमती सामान हुआ था जब्त
कर्नाटक में 2018 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले करोड़ों रुपये का सामान जब्त हुआ था। इनमें 67.27 करोड़ रुपये कैश, 23.36 करोड़ रुपये की 5 लाख लीटर शराब, 43.17 करोड़ रुपये का सोना और 18.57 करोड़ रुपये का दूसरा सामान था। इस पूरे मामले में काँग्रेस के साथ बीजेपी के कार्यकर्ता भी थे और दोनों पार्टियों के कई कार्यकर्ताओं के पास से ये जब्त किया गया था, जिसका इस्तेमाल वोट बैंक बढ़ाने के लिए लोगों को बांटने के तौर पर किया जाना था। इनमें से 32.54 करोड़ रुपये कैश को वेरिफिकेशन के बाद रिलीज़ कर दिया गया था।
साउथ के राज्यों का रहा है 'कैश फॉर वोट' का इतिहास
साऊथ के राज्यों में कैश के बदले वोट का पुराना इतिहास रहा है। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में वोट पाने के लिए कैश या गोल्ड का इस्तेमाल करने के कई मामले पहले सामने आ चुके हैं।