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लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस की अग्निपरीक्षा, कर्नाटक में 29 अगस्त को निकाय चुनाव

लोकसभा चुनाव से पहले कर्नाटक में भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस की अग्निपरीक्षा।

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लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस की अग्निपरीक्षा, कर्नाटक में 29 अगस्त को निकाय चुनाव

नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। सभी राजनीतिक पार्टियों ने इसके लिए एड़ी-चोटी एक कर दी है। खासकर, भाजपा और कांग्रेस, जो किसी भी हाल में 2019 में जीत दर्ज करना चाहती है। लेकिन, भाजपा और कांग्रेस को लोकसभा चुनाव से पहले एक और अग्निपरीक्षा देनी होगी। दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग ने कर्नाटक निकाय चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है। कर्नाटक में 29 अगस्त को 105 शहरी निकायों में चुनाव कराने का फैसला लिया गया है।

कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के लिए अग्निपरीक्षा

करीब दो महीने पहले कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी थी। लिहाजा, माना जा रहा है कि दोनों ही पार्टियों के लिए यह अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। हालांकि, अभी यह फैसला नहीं लिया गया है कि दोनों दल साथ मिलकर निकाय चुनाव लड़ेगी या फिर अकेले-अकेले। इतना ही नहीं इस चुनाव के नतीजे बताएंगे कि दो महीनों में कुमारस्वामी सरकार के प्रति लोगों का नजरिया क्या है? आम चुनावों से पहले होने वाले इस निकाय चुनाव को लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है कि क्या जनता ने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन पर मुहर लगाई है या नहीं? वहीं, भाजपा निकाय चुनावों को लेकर काफी उत्साहित है, क्योंकि हालिया विधान सभा चुनावों में भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ऐसे में तीनों ही पार्टियों के लिए यह निकाय चुनाव काफी मायने रखता है।

2013 में कांग्रेस ने किया था क्लीन स्विप

गौरतलब है कि इससे पहले साल 2013 में निकाय चुनाव कराए गए थे, जिसमें कांग्रेस ने क्लीन स्विप किया था। इसके कुछ दिन बाद ही विधानसभा के चुनाव हुए, उसमें भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। वहीं, इस बार चुनाव दो चरणों में होंगे। राज्य में कुल 207 शहरी निकाय हैं। कुल 2574 वार्ड पार्षदों की सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें से अधिकांश राज्य के उत्तरी क्षेत्र में हैं। 105 शहरी निकायों में 70 उत्तरी कर्नाटक में आते हैं, जहां अलग राज्य के लिए आंदोलन की चेतावनी दी गई थी लेकिन आंदोलन थम गया। अब देखना यह है कि लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले इस निकाय चुनाव में किसी पार्टी की स्थित सबसे ज्यादा मजबूत होती है।