
नई दिल्ली: चारा घोटाले के चाइबासा मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने पांच साल के लिए दोषी करार दिया है। चारा घोटाले में सजा पाने वाले जगन्नाथ मिश्रा ने प्रोफेसर के रूप में अपना करियर शुरू किया था और बाद में बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने। इस दौरान उन्होंने कई किताबें भी लिखी। जगन्नाथ मिश्रा तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। जगन्नाथ मिश्रा की रुचि राजनीति में बचपन से ही थी। क्योंकि उनके बड़े भाई, ललित नारायण मिश्रा राजनीति में थे और रेल मंत्री थे। बिहार में बड़े नेताओं के तौर पर जाने जाते थे। उनके पुत्र नीतीश मिश्रा भी राजनीति में है और उन्होंने बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। जगन्नाथ मिश्रा विश्वविद्याल में पढ़ाने के दौरान ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए।
1975 में पहली बार बने थे बिहार के मुख्यमंत्री
जगन्नाथ मिश्रा 1975 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। दूसरी बार उन्हें 1980 में कमान सौंपी गई और आखिरी बार 1989 से 1990 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। वह 90 के दशक के बीच केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी रहे। जगन्नाथ मिश्रा कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए ।
1996 में 900 करोड़ रुपए का चारा घोटाला सामने आया
साल 2013 में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट से जगन्नाथ मिश्रा को चारा घोटाले में दोषी करार दिया गया। जबकि 23 दिसंबर 2017 को उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। आज से 21 साल पहले 1996 में 900 करोड़ रुपए का चारा घोटाला सामने आया था।सीबीआई ने 1997 में चार्जशीट फाइल की थी। सीबीआई ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्रा समेत 44 से ज्यादा लोगों को दोषी करार दिया था। इस मामले में वर्ष 2002 में रांची के विशेष सीबीआई कोर्ट में ट्रायल शुरू हुई।
चाईबासा ट्रेजरी में 76 आरोपी थे शामिल
चाईबासा ट्रेजरी से 1992-93 में 67 फर्जी आवंटन पत्र पर 33.67 करोड़ की अवैध निकासी हुई थी। 1996 में केस दर्ज हुआ। कुल 76 आरोपी थे। सुनवाई के दौरान 14 आरोपियों का निधन हो गया। दो आरोपी सुशील कुमार झा और प्रमोद कुमार जायसवाल ने जुर्म कबूल लिया। तीन आरोपियों दीपेश चांडक, आरके दास और शैलेश प्रसाद सिंह को सरकारी गवाह बना दिया गया।
Published on:
24 Jan 2018 05:42 pm
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