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महबूबा मुफ्ती का दावा, फिर किया गया नजरबंद, बोलीं- यही है कश्मीर की असली तस्वीर

Jammu Kashmir पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ता फिर हुई नजर बंद, त्राल में पीड़ित परिवार से मिलने जाते वक्त रोका गया

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PDP Chief Mehbooba Mufti

PDP Chief Mehbooba Mufti

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर ( Jammu Kashmir ) से एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी ( PDP ) चीफ महबूबा मुफ्ती ( Mehbooba Mufti ) ने दावा किया है कि उन्हें एक बार फिर से नजरबंद कर दिया गया है।

महबूबा ने कहा है कि त्राल में सेना की ओर से की गई मारपीट के पीड़ित परिवार से मिलने वह त्राल जा रही थीं, लेकिन उन्हें रोकने के साथ ही एक बार फिर घर में ही बंद कर दिया गया है।

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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती ने कहा कि 'मैं दक्षिण कश्मीर के त्राल जाना चाहती थी। लेकिन पुलिस ने मुझे घर में नजरबंद कर दिया है। मेरे घर के बाहरी दरवाजे पर पुलिस ने बाहर से ताला लगा दिया है।

त्राल में बीते दिनों सुरक्षाबलों ने ग्रामीणों के साथ मारपीट की है, मैं वहां हालात का जायजा लेने और पीड़ितों से मिलने जाना चाहती थी। इस बीच, एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि पीडीपी की अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती को एसपी अवंतीपोर व दक्षिण कश्मीर रेंज के डीआइजी ने सुरक्षा कारणों से त्राल न जाने की सलाह दी है।'

मुफ्ती ने ट्वीट किया, 'सेना की ओर से कथित तौर पर एक परिवार से मारपीट के बाद मेरे त्राल दौर पर जाने की वजह से आज मुझे मेरे घर में बंद कर दिया गया है। यह कश्मीर की असली तस्वीर है। भारत सरकार को यहां आने वाले प्रतिनिधिमंडल को पिकनिक टूर की बजाय यह तस्वीर दिखानी चाहिए।'

मुफ्ती ने ट्वीट में तस्वीर भी साझा की है। इसमें गुपकर रोड स्थित उनके घर के मेन गेट पर सेना के वाहन दिख रहे हैं।

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बता दें कि दो दिन पहले ही महबूबा मुफ्ती ने मीडिया की स्वतंत्रता पर चिंता सताई थी। उन्होंने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को खत लिखा कि विशेषकर कश्मीर में पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

लिहाजा कश्मीर में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया इस मामले की जांच के लिए कश्मीर में एक टीम भेजे।
यही नहीं पीडीपी वर्करों ने श्रीनगर में पीडीपी पार्टी कार्यालय के बाहर मीडिया की स्वतंत्रता और अधिकारों के तथाकथित हनन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था।
वहीं कांग्रेस नेता गुलाम नबी लोन ने कहा था कि कश्मीर में अभिव्यक्ति की आजादी का हक खत्म हो चुका है। यहां जो कोई भी सरकार की जननीतियों के खिलाफ बोलता है, उसके खिलाफ लिखता है उसे झूठे मामलों में फंसा दिया जाता है।