विदेश मंत्री बनते ही जयशंकर का ट्वीट, 'सुषमा के नक्शे कदम पर चलना गर्व की बात'

विदेश मंत्री बनते ही जयशंकर का ट्वीट, 'सुषमा के नक्शे कदम पर चलना गर्व की बात'

Kaushlendra Pathak | Updated: 01 Jun 2019, 04:38:55 PM (IST) राजनीति

  • जनवरी 2015 में विदेश सचिव बने थे जयशंकर
  • मनमोहन सिंह 2013 में जयशंकर को बनाना चाहते थे विदेश सचिव
  • चीन में हुई थी पीएम मोदी और जयशंकर की मुलाकात

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद देश में मोदी सरकार-2 का आगाज हो चुका है। विभागों का बंटवारा होते ही मंत्रियों ने पदभार संभाल लिए हैं। कुछ मंत्रियों ने तो कामकाज भी शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में नवनिर्वाचित विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ( Subrahmanyam Jaishankar ) ने विदेश मंत्रालय ( Ministry of External Affairs ) का पदभार संभालने के बाद पहला ट्वीट किया है। इस ट्वीट में जयशंकर ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की तारीफ की है।

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सुषमा के पदचिन्हों पर चलना गर्व की बात- जयशंकर

विदेश मंत्री जयशंकर ने ट्वीट किया, 'मेरा पहला ट्वीट आप सभी का शुभकामना संदेशों के लिए शुक्रिया! महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद से गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। सुषमा स्वराज जी के पदचिह्नों पर चलना बहुत गर्व से भरा हुआ अहसास है।' गौरतलब है कि पीएम मोदी ने शुक्रवार को मंत्रालय के बंटवारे में जयशंकर को विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। गौरतलब है कि शपथ ग्रहण तक किसी को मालूम नहीं था कि पीएम मोदी जयशंकर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देंगे। लेकिन, अचानक पीएम ने जयशंकर को इतना बड़ा मंत्रालय देकर सबको चौंका दिया।

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मनमोहन सिंह जयशंकर को बनाना चाहते थे विदेश सचिव

यहां आपको बता दें कि एस जयशंकर काफी फेमस ब्यूरोक्रेट रह चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने कार्यकाल में उन्हें विदेश सचिव बनाना चाहते थे। लेकिन, किसी कारण यह नहीं हो सका। साल 2014 में जब केन्द्र में मोदी सरकार आई तो उन्हें विदेश सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं, इस बार उन्हें सुषमा स्वराज की जगह विदेश मंत्री बनाया गया।

चीन में पहली बार मोदी और जयशंकर की हुई थी मुलाकात

गौरतलब है कि पीएम मोदी और जयशंकर की पहली मुलाकात साल 2012 में हुई थी। जब बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी ने चीन का दौरा किया था। चीन में ही पीएम मोदी और जयशंकर की मुलाकात हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि मनमोहन सिंह 2013 में ही उन्हें विदेश सचिव बनाना चाहते थे, लेकिन फिर उन्होंने सुजाता सिंह को चुना। मोदी ने पीएम बनने के बाद सुजाता के बाद जयशंकर को ही उस पोस्ट के लिए चुना। एस जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव रहे।

चीन से संबंध सुधरने के आसार

ऐसा माना जा रहा है कि जयशंकर के विदेश मंत्री बनने से भारत और चीन के बीच रिश्ते सुधर सकते हैं। क्योंकि, जयशंकर ने विदेश सचिव के रूप में अमेरिका, चीन समेत बाकी देशों के साथ भी महत्वपूर्ण बातचीतों में हिस्सा लिया। चीन के साथ 73 दिन तक चले डोकलाम विवाद को सुलझाने में भी जयशंकर का अहम रोल बताया जाता है। इससे पहले 2010 में चीन द्वारा जम्मू कश्मीर के लोगों को स्टेपल वीजा दिया जाता था। इस पॉलिसी को बदलवाने में भी जयशंकर का अहम रोल रहा है। अब देखना यह है कि बतौर विदेश मंत्री जयशंकर का कार्यकाल कैसा रहता है।

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