
इन 10 मोर्चों पर मोदी सरकार ने मारी बाजी
नई दिल्ली। चार साल पहले कांग्रेस-नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को हराकर केंद्र में पीएम मोदी की सरकार सत्तासीन हुई थी। 1984 के बाद 2014 का चुनाव पहला मौका था, जब देश की जनता ने किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत दिया। देश की आजादी के बाद पहला मौका था जब किसी गैर-कांग्रेसी दल को लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ। 2014 में सरकार बनाने से पहले पीएम मोदी ने देश की जनता से ढेरों वादे किए थे। चुनावी वादों को पूरा करने के लिए पीएम मोदी ने कई कदम उठाए। इनमें से बहुत-से कदम ऐसे भी रहे, जो पहले कभी नहीं उठाए गए। इनमें से 10 योजनाएं जो जनहित से जुड़ीं थीं का जनता पर सकारात्मक असर पड़ा और लोगों को उसका लाभ मिला।
मोदी सरकार की 10 असरकारी योजनाएं :
1. प्रधानमंत्री जन-धन योजना
इस योजना को सरकार की सबसे ज्यादा कामयाब योजनाओं में से एक माना जाता है। केंद्र सरकार का कहना है कि आजादी के 70 साल बीत जाने पर भी करोड़ों की आबादी बैंकिंग व्यवस्था से दूर रही। अधिकांश जनता के पास एक बैंक बचत खाता तक नहीं था। ऐसे लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए सरकार ने जीरो-बैलेंस बैंक बचत खाते खुलवाए। गरीब देशवासियों ने जीरो-बैलेंस खाते होने के बावजूद अपने खातों में 81,203 करोड़ रुपए बैंकों में जमा कराए। पिछले चार सालों में जन-धन योजना के तहत 30 करोड़ से अधिक परिवारों के बैंक खाते खोले गए हैं। इससे पहले करीब 42 प्रतिशत परिवार बैंकिंग सेवा से नहीं जुड़े थे। आज के दिन में जीरो डिपॉजिट बैलेंस खातों का अनुपात 77 से घटकर 20 फीसदी रह गया है। सितंबर, 2014 में 76.81 फीसदी खातों में जमा राशि शून्य थी। अब इस तरह के खाते कम होकर 20 फीसदी रह गए हैं। वर्तमान में देश के 99 फीसद से ज्यादा परिवारों के पास कम से कम एक बैंक खाता है।
2. उज्ज्वला योजना
उज्ज्वला योजना को पीएम मोदी के दिमाग की उपज माना जाता है। इस योजना को सफल बनाने के लिए उन्होंने करोड़ों संपन्न भारतीयों से रसोई गैस सिलेंडरों पर मिलने वाली सब्सिडी को स्वेच्छा से छोड़ने की अपील की थी। पीएम के इस अपील का असर यह हुआ कि देश के करोड़ों लोगों ने गैस सब्सिडी का त्याग कर दिया। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उसी सब्सिडी के बल पर केंद्र सरकार ने 3,94,60,489 गरीब महिलाओं के रसोईघरों में गैस पहुंचाने का करिश्मा कर दिखाया है। एक मई, 2016 को इस योजना की शुरुआत पीएम मोदी ने यूपी के बलिया से की थी। 2019 तक गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले सभी परिवारों के लिए 5 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य है। इस योजना को मकसद महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। ऐसा इसलिए कि जलावन पर खाना पकाते समय लकड़ियों से निकलने वाले हानिकारक धुएं नुकसानदेह होता है।
3. जनसुरक्षा योजना
भारत में जीवन बीमा करने के लिए आज लाइफ इंश्योरेंस ऑफ इंडिया (एलआईसी) समेत कई कंपनियां मौजूद हैं, जिनके पास करोड़ों ग्राहक भी हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कभी कोई बीमा पॉलिसी जारी नहीं की गई। 9 मई, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसुरक्षा योजना के तहत तीन योजनाओं की घोषणा की थी, जिनमें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) भी शामिल थी। पीएमजेजेबीवाई दो लाख रुपए तक का जीवन बीमा प्रदान करती है, यानी बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाने की स्थिति में उसके परिवार को दो लाख रुपए की राशि दी जाती है। पीएमजेजेबीवाई के तहत मिलने वाली पॉलिसी को हर वर्ष नवीकृत करना होता है, और उसके लिए 330 रुपए की प्रीमियम राशि देनी होती है। इस राशि के अतिरिक्त बीमित व्यक्ति को मौजूदा वर्ष में लागू सर्विस टैक्स तथा बैंकों की एडमिनिस्ट्रेटिव फीस के तौर पर 41 रुपए चुकाने होते हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि मई, 2018 तक लगभग 19 करोड़ भारतीय इस योजना में शामिल हो चुके हैं। 9 मई, 2015 को प्रधानमंत्री ने जिन दो अन्य योजनाओं की घोषणा की थी, वे प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना हैं।
4. मुद्रा योजना
देश में बड़े पैमाने पर व्याप्त बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने लोगों को स्वरोजगार की ओर मोड़ने का प्रयास किया तथा युवाओं से अपना-अपना कारोबार स्थापित करने का आग्रह करते हुए मुद्रा योजना शुरू की, जिसके तहत सरकार की ओर से ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि लोग अपना व्यापार शुरू कर सकें या पहले से स्थापित व्यापार का विस्तार कर सकें। इस योजना को भी सरकार खासा कामयाब बताती है, और उसका दावा है कि मई, 2018 तक मुद्रा योजना के अंतर्गत 12,78,08,684 ऋण वितरित किए गए हैं। आठ अप्रैल 2015 को 20 हजार करोड़ रुपए के कॉर्पस फंड और 3,000 करोड़ रुपए के क्रेडिट गारंटी कॉर्पस के साथ माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेट ;मुद्रा द्ध बैंक योजना की षुरुआत हुई थी।
5. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
देश में किसानों की समस्याओं का निराकरण करने के उद्देश्य से मोदी की सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना बनाने की घोषणा की थी। इसकी शुरुआत फरवरी, 2015 में राजस्थान से पीएम मोदी ने की थीं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का उद्देश्य देश के सभी किसानों की 12 करोड़ जोतों के सॉयल हेल्थ के विषय में जानकारी प्रदान करना है। इसके तहत मई, 2018 तक 13,33,13,396 सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा चुके हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि सॉयल हेल्थ कार्ड से किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा और वह इस कार्ड की मदद से न सिर्फ जमीन की उपजाऊ शक्ति को समझ पाएंगे, बल्कि यह भी जान पाएंगे कि उन्हें किस फसल के लिए कितना यूरिया और खाद खर्च करना पड़ेगा। सरकार का दावा है कि इस सॉयल हेल्थ कार्ड की मदद से किसानों को अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
6. उजाला योजना
लगातार बढ़ती आबादी के लिए जरूरी बिजली की मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने जनता से आग्रह किया कि साधारण बल्बों, ट्यूबलाइटों तथा सीएफएल बल्बों के स्थान पर एलईडी बल्बों का इस्तेमाल करें। ताकि बिजली की खपत को कम किया जा सके। यही नहीं, सरकार ने उजाला योजना के अंतर्गत सस्ती दरों पर एलईडी बल्ब भी उपलब्ध करवाए। उजाला योजना के तहत मई, 2018 तक 30 करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब लोगों में बांटे गए हैं। इस योजना की शुरुआत अप्रैल, 2016 में हुई थी।
7. भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क योजना
देश के सभी गांवों तक तकनीक का फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से नरेंद्र मोदी सरकार ने ऑप्टिकल फाइबर के जरिए सारे देश में नेट-कनेक्टिविटी की व्यवस्था करने के लिए बीबीएनएल के माध्यम से काम शुरू किया। सरकार का कहना है कि गांवों तक तकनीक का विस्तार होने से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा और सभी देशवासियों तक सूचना का विस्तार भी सरल हो सकेगा। केंद्र सरकार का दावा है कि मई, 2018 तक देश के 1,15,703 गांवों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है।
8. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना
देश के कोने-कोने तक बिजली पहुंचाने की के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस योजना की शुरुआत की। नवंबर, 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस योजना की घोषणा की थी। मई, 2018 तक देश के ऐसे 18,374 गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है, जहां अब तक बिजली नहीं थी।
9. डिजिटल इंडिया
डिजिटल इंडिया प्रधानमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। डिजिटल इंडिया की शुरुआत 21 अगस्त, 2014 को हुई थी। इस अभियान का मकसद भारत को एक इलेक्ट्रॉनिक अर्थव्यवस्था में बदलना है। सरकार की मंशा है कि सभी सरकारी विभाग और भारत की जनता एक दूसरे से डिजिटल रूप से या इलेक्ट्रॉनिक तौर पर जुड़ें ताकि प्रभावी प्रशासन चलाया जा सके। सबसे महत्वपूर्ण यह कि इसके तहत देश के सभी गांवों और ग्रामीण इलाकों को इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना है।
10. स्वच्छ भारत अभियान
स्वच्छ भारत अभियान प्रधानमंत्री ने 24 सितंबर, 2014 को स्वच्छ भारत अभियान को मंजूरी दी थी। यह पिछली सरकार द्वारा शुरू किए गए निर्मल भारत कार्यक्रम का संशोधित रूप है। स्वच्छ भारत अभियान को औपचारिक रुप से महात्मा गांधी की जयंती पर 2 अक्टूबर, 2014 को शुरू किया गया था। इसके तहत 2019 तक यानी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक भारत को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य है।
Published on:
25 May 2018 10:59 am
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