
नई दिल्ली: एनसीपी और कांग्रेस के बीच रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे हैं। गुजरात के राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत के बाद दोनों पार्टियों के बीच तनातनी ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन इस तनातनी के बीच एनसीपी ने कहा है कि मोदी सरकार से हाथ मिलाने का कोई सवाल नहीं है। पार्टी ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि वह भविष्य में गुजरात और महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। हालंकि कांग्रेस में एनसीपी को लेकर गुस्सा कम नहीं हो रहा है।
मोदी कैबिनेट में एनसीपी को शामिल होने की उम्मीद
गुजरात कांग्रेस ने प्रदेश में एक सितंबर की पार्टी की किसान रैली में एनसीपी को न्योता नहीं दिया है। गुजरात कांग्रेस ने कांग्रेस हाईकमान पर अंतिम निर्णय छोड़ दिया है। वहीं कांग्रेस हाईकमान को अंदेशा है कि एनसीपी रैली में शामिल नहीं होगी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि एनडीए के होने वाले मंत्रिमंडल फेरबदल में एनसीपी भी शामिल हो सकता है।
एनसीपी के विधायक ने किया था एनडीए को वोट
इससे पहले गुजरात के राज्यसभा चुनाव में एनसीपी के एक विधायक ने कांग्रेस और दूसरे ने एनडीए को वोट दिया था। गुजरात के जदयू विधायक छोटूभाई वसावा ने कहा कि एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने उनको फोन कर भाजपा के उम्मीदवार को वोट करने के लिए कहा था। कांग्रेस इस वजह से भी काफी नाराज चल रही है। हालांकि वे चाहती नहीं कि एनसीपी उसका साथ छोड़कर भाजपा का हाथ थामे। इसलिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और अहमद पटेल एनसीपी प्रमुख शरद पवार से संपर्क में है।
एनसीपी यूपीए का हिस्सा
एनडीए में शामिल होने की अटकलों को लेकर एनसीपी नेता और राज्यसभा सांसद माजिद मेनन ने कहा कि एनसीपी यूपीए का हिस्सा है। कांग्रेस से कुछ शिकायतें हो सकती हैं। मगर एनडीए में जाने का सवाल नहीं है। इस शिकायतों को दूर करने की कोशिश की जाएगी।
Published on:
22 Aug 2017 06:20 pm
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