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खत्म होगी 92 साल पुरानी अलग रेल बजट की परंपरा

केंद्र सरकार ने रेलवे बजट को हर साल संसद में अलग से पेश करने की दशकों पुरानी प्रथा को खत्म करने का फैसला लिया है। अगले वित्त वर्ष से रेल बजट आम बजट के साथ ही पेश किया जाएगा।

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Dhirendra Kumar Mishra

Aug 13, 2016

indian rail

old indian railway

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रेलवे बजट को हर साल संसद में अलग से पेश करने की दशकों पुरानी प्रथा को खत्म करने का फैसला लिया है। अगले वित्त वर्ष से रेल बजट आम बजट के साथ ही पेश किया जाएगा। इसके साथ ही 1924 से चली आ रही परंपरा को 2017 से खत्म कर दिया जाएगा।

टीम की रिपोर्ट पर लिया अंतिम फैसला
रेल बजट को अलग पेश न करने व आम बजट का हिस्सा बनाने पर वित्त मंत्रालय भी राजी हो गया है। वित्त मंत्रालय ने सही फैसले पर पहुंचने के लिए पांच सदस्यों की टीम बनाई थी। टीम की रिपोर्ट पर ही अंतिम रूप से यह निर्णय लिया गया है। सुरेश प्रभु ने भी राज्य सभा में कहा था कि उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली से रेल बजट को खत्म करने को कहा है। प्रभु ने कहा था कि इससे आने वाले वक्त में देश को आर्थिक फायदा होगा।

अब वित्त मंत्रालय के अधीन होगी भारतीय रेल
आम बजट का हिस्सा होते ही भारतीय रेल वित्त मंत्रालय के अधीन हो जाएगी। जैसा कि बाकी मंत्रालयों की स्थिति है। अभी तक इसका बजट अलग होने की वजह से यह वित्त मंत्रालय से अलग माना जाता रहा है। अब रेलवे द्वारा किए जा रहे खर्चे और कमाई पर वित्त मंत्रालय की भी नजर रहेगी।

देबराय और देसाई ने की थी मांग
रेलवे बजट की परंपरा कोई आज की नहीं है। यह ब्रिटिश काल से चली आ रही है। 1924 से चली आ रही इस परंपरा को सबसे पहले नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबराय और किशोर देसाई ने खत्म करने की बातें की थी।

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