
मुंबई। सियासत भी क्या चीज है। इसमें वाकई कब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। इसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र है। बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले उद्धव ठाकरे ने अपनी कैबिनेट में एक ऐसे शख्स को भी शपथ दिलवाई है, जिसने एक वक्त उनके पिता बालासाहेब ठाकरे की गिरफ्तारी का वारंट जारी करवाया था।
महाराष्ट्र के नए और ठाकरे परिवार के पहले मुख्यमंत्री बने उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल में शामिल इस शख्स का नाम छगन भुजबल है। छगन भुजबल ने 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में लगातार चौथी बार जीत हासिल की है और येवला सीट से चुनाव लड़े थे।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक छगन भुजबल एक वक्त प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। 15 अक्टूबर 1947 को जन्मे छगन भुजबल का करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक ऐसा वक्त था जब भुजबल मुंबई स्थित भायखला बाजार में सब्जी बेचते थे। हालांकि उनपर शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे के भाषणों का काफी प्रभाव था।
अपनी मां के साथ सब्जी बेचने वाले छगन भुजबल की राजनीति में बढ़ती दिलचस्पी के चलते उन्होंने अपना खानदानी काम छोड़ दिया। भुजबल ने पढ़ाई के लिए वीजेआईटी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला भी लिया, लेकिन राजनीति के चलते पढ़ाई को गुडबाय बोल दिया। इसके बाद वह शिवसेना से जुड़ने के लिए प्रयास में लग गए और उनकी मेहनत 1985 में तब सफल हुई जब उन्हें मुंबई का मेयर चुना गया।
फिर 1986 में महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के दौरान छगन भुजबल फेदर कैप, सफेद कोट, दाढ़ी और हाथ में पाइप लिए हुए पुलिस को चकमा देकर बेलगाम पहुंचे और वहां भाषण दिया। भुजबल ने यह हिम्मत उस वक्त दिखाई थी जब कर्नाटक में महाराष्ट्र के नेताओं के जाने पर पाबंदी लगी हुई थी। यों तो उनकी तुरंत गिरफ्तारी कर ली गई लेकिन उनके इस कदम का मराठियों ने काफी स्वागत किया और बालासाहेब ठाकरे ने भी उनके इस काम की तारीफ करते हुए शिवाजी पार्क में एक रैली आयोजित कर सम्मानित किया।
इसके बाद 1990 में एक वक्त ऐसा भी आया जब शिवसेना-भाजपा के गठबंधन के साथ राम मंदिर मुद्दा चर्चा में था और भुजबल ने पार्टी छोड़ दी। इसकी वजह बालासाहेब द्वारा विधानसभा चुनाव में 52 सीटों पर जीत हासिल करने के बाद मनोहर जोशी को विपक्ष का नेता चुना जाना था, जबकि बताया जाता है कि भुजबल यह पद हासिल करना चाहते थे।
शिवसेना छोड़ने के बाद 1991 में छगन भुजबल ने 9 विधायकों के साथ कांग्रेस ज्वाइन कर ली। बताया जाता है कि इस फैसले से बालासाहेब बहुत गुस्सा हुए और आलम यह हो गया कि शिवसैनिकों ने भुजबल के बंगले पर हमला भी कर दिया।
वर्ष 1999 में शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बनाई और महाराष्ट्र चुनाव में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन ने विजय हासिल की। इस सरकार में भुजबल को महाराष्ट्र का गृह मंत्री नियुक्त किया गया। तब प्रदेश के गृह मंत्री छगन भुजबल के दफ्तर ने मुंबई दंगों के मामले में बालासाहेब ठाकरे की गिरफ्तारी का आदेश जारी किया। 25 जुलाई 2000 को ठाकरे की गिरफ्तारी हुई। हालांकि अदालत ने ठाकरे को छोड़ दिया था।
Updated on:
28 Nov 2019 11:25 pm
Published on:
28 Nov 2019 11:04 pm
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