संसदीय समिति ने FB इंडिया से 200 मिनट में पूछे 100 सवाल, जवाब देने के लिए मिले 7 दिन

  • Parliamentary committee के 30 सदस्यों ने FB India के हेड अजीत मोहन से 100 से ज्यादा सवाल पूछे।
  • संसदीय कमेटी फेसबुक इंडिया के प्रमुख को आगे भी चर्चा के लिए बुला सकती है।
  • अमरीकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल और टाइम्स मैगजीन के एक खुलासे के बाद hate speech इंडिया में सियासी मुद्दा बना।

By: Dhirendra

Updated: 03 Sep 2020, 02:00 PM IST

नई दिल्ली। हेट स्पीच और पोस्ट को लेकर आईटी पर संसद की स्थायी समिति ( Parliament Standing Committee on IT ) के प्रमुख शशि थरूर ( Shashi tharoor ) की अध्यक्षता में सुनवाई हुई। इस दौरान समिति सदस्यों ने फेसबुक इंडिया ( Facebook India ) की भेदभावपूर्ण नीतियों को लेकर सख्त आलोचना की। इस मुद्दे पर फेसबुक इंडिया के प्रतिनिधियों से समिति ने 200 मिनट से ज्यादा समय तक बातचीत की। इस दौरान समिति के 30 सदस्यों ने भारत में फेसबुक के प्रमुख अजीत मोहन से 100 से ज्यादा सवाल पूछे और उनका जवाब मांगा।

बीजेपी के हेट स्पीच को नजरअंदाज क्यों किया?

दरअसल, यह मसला अमरीकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ( The Wall Street Journal ) और टाइम्स मैगजीन ( Times Magazine ) की ओर से फेसबुक पर किए गए खुलासों के बाद भारत में सियासी मुद्दा ( Political agenda ) बना है। कांग्रेस नेता शशि थरूर के नेतृत्व वाली संसदीय कमेटी ने इस पर फेसबुक के इंडिया हेड को सफाई देने के लिए बुलाया था। जानकारी के मुताबिक संसदीय समिति के कुछ सदस्यों ने बीजेपी के पक्ष वाले पोस्ट और हेट स्पीच का प्रचार करने वाले पेजों को नजरअंदाज करने के लिए फेसबुक की जमकर खिंचाई की।

दूसरी तरफ बीजेपी के सदस्यों ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए फेसबुक इंडिया के प्रतिनिधियों से कश्मीर से लेकर जय श्रीराम के मुद्दे पर फेसबुक हेड से कई सवाल पूछे। बीजेपी सांसदों ने एक सवाल यह पूछा कि क्या जय श्रीराम कहना फेसबुक की पॉलिसी के हिसाब से सांप्रदायिक है? कुछ अन्य सवालों में सांसदों ने फेसबुक के साथ कांग्रेस के रिश्तों को खंगाला।

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कांग्रेस नेताओं से रिश्ते पर भी पूछे गए सवाल

बीजेपी सांसदों ने पूछा कि फेसबुक अफसरों के कांग्रेस नेता अहमद पटेल से क्या रिश्ते हैं? फेसबुक के फैक्ट चैकिंग बोर्ड में शामिल कोई पार्टनर क्या कांग्रेस के डाटा एनेलेटिक्स में काम कर चुका है या नहीं?

इसके अलावा कमेटी ने फेसबुक से कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के पोस्ट और वामपंथी लेखों पर भी सवाल किए। पूछा गया कि राष्ट्रवादी विचारधारा से संबंधित कितने पोस्ट 2019 में फेसबुक ने डिलीट किए?

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राष्ट्रवादी विचारधारी से जुड़े पेज सबसे ज्यादा क्यों हटाए गए?

संसदीय समिति की सुनवाई के दौरान यह भी पूछा गया कि क्या यह सही है कि राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े वे 700 पेज हटाए गए जिनकी कुल फॉलोविंग 26 लाख से अधिक थी? क्या यह सही है कि कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा से जुड़े जो लेख हटाए गए। उनकी कुल फालोविंग 2 लाख थी।

एफबी ने लोकसभा चुनाव को प्रभावित किया?

क्या लोकसभा चुनाव 2019 ( Lok Sabha Election 2019 ) में कैम्ब्रिज एनेलेटिका ( Cambridge Analytica ) कांग्रेस के साथ मिलकर काम कर रही थी? क्या फेसबुक ने 2019 के चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया था? नरेंद्र मोदी के बयानों के बारे में फेसबुक ने कितने फैक्ट चेक किए। कांग्रेस ( Congress ) अध्यक्ष सोनिया गांधी के बयानों को कितनी बार चेक किया गया?

जवाब देने के लिए एफबी को मिला 7 दिन का समय

आईटी पर संसद की स्थायी समिति की पैनल ने अजीत मोहन से क्या सवाल किए, इसको लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन शशि थरुर ने पूछताछ समाप्त होने के बाद ट्विट कर कहा कि फेसबुक इंडिया के हेड से समिति की करीब 3.5 घंटे तक बैठक चली। इसमें फैसला हुआ कि हमारी चर्चा आगे भी जारी रहेगी। पैनल अजीत मोहन को अगले हफ्ते जवाब देने के लिए फिर समन कर सकता है।

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