बुरहानपुर. हृदय गति या सांस रुक जाने के बाद हेल्थ इमरजेंसी के समय दिए जाने वाली सीआरपी(कार्डियो पल्मोनरी रिसस्सीटेशन) का पुलिस जवानों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा रहा है। किसी भी कार्यक्रम या भीड़ वाली क्षेत्र में ऐसी स्थिति होने पर पुलिस जवान सुरक्षा के साथ सीआरपी देकर किसी लेागों की जान भी बचा सकेंगे।
जिला पुलिस लाइन सहित पुलिस थानो में शनिवार को जिले के 400 पुलिस जवानों को डेमों दिखाकर सीआरपी देने का सही तरीका समझाकर उन्हे ट्रेनिंग देकर तैयार किया गया। एसपी राहुल कुमार लोढा ने बताया कि पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना के निर्देश पर मेडिकल विशेषज्ञों द्वारा पुलिस जवानों को हृदय गति या सांस रुक जाने पर दी जाने वाली हेल्थ इमरजेंसी सीआरपी की ट्रेनिंग दी गई। डेमो देकर बताया गया कि सीआरपी कैसे दी जानी चाहिए। क्या -क्या सावधानियां रखी जानी चाहिए। ताकि स्वास्थ्य इमरजेंसी के समय सही तरीके से सीआरपी दी जाए।
पूर्व में हो चुकी है घटनाएं
पिछले कुछ वर्षो में देश में हार्टअटैक के मामले बढ़े है साथ ही भीड़ के समय सांस लेने में तकलीफ होने पर ऐसी घटनाएं हुई है। इसलिए जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर देता है, तो उसे कार्डिएक अरेस्ट होता है। कार्डिएक अरेस्ट के दौरान, हृदय मस्तिष्क और फेफड़ों सहित शरीर के बाकी हिस्सों में खून पंप नहीं कर सकता। उपचार के बिना मिनटों में व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। सीपीआर में मरीज की छाती पर दबाव बनाया जाता है जिससे ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद मिलने से व्यक्ति की धड़कने चालू रखी जा सकती है, जिससे पीडि़त को अस्पताल पहुंचाने तक मदद मिलती है।