
rahul gandhi
नई दिल्ली।अमेठी में कांग्रेस की सियासी बादशाहत आजादी के बाद से अभी तक बरकरार है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चौथी बार इस सीट से कुछ देर में नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। 2014 की तरह इस बार भी उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी से है। ऐसा इसलिए कि सपा-बसपा ने राहुल गांधी के समर्थन में यहां से उम्मीदवार नहीं उतारा है। महागठबंधन के इस फैसले से इस बार कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा और रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है।
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इस सीट पर कांग्रेस को 16 बार मिल चुकी है जीत
अमेठी संसदीय सीट पर अभी तक 16 बार लोकसभा चुनाव और 2 बार उपचुनाव हुए हैं। इन चुनावों में कांग्रेस को 16 बार जीत मिली है। पहली बार 1977 में जनता पार्टी के राघवेंद्र प्रताप सिंह और दूसरी बार 1998 में भाजपा के डॉ. संजय सिंह के हाथों कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा था। यही कारण है कि अमेठी को कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है।
मोदी लहर में भी विरोधियों को नहीं मिली जीत
बता दें कि अमेठी लोकसभा सीट की सियासी खुशबू ऐसी है जो सिर्फ कांग्रेस के चुनाव निशान को पहचानती है। यही कारण है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भी मोदी लहर पर सवार भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी कमल नहीं खिला पाई थीं। मोदी लहर के बावजूद 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 4,08,651 वोट मिले थे। भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी को 3,00,74 वोट मिले थे। उन्हें 1,07,000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि 2009 में कांग्रेस अध्यक्ष की जीत का अंतर 3,50,000 से भी ज्यादा का रहा था।
क्या है अमेठी का गणित
इस सीट पर दलित और मुस्लिम मतदाता किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं। मुस्लिम मतदाता करीब 4 लाख तो दलित मतदाताओं की संख्या करीब साढ़े तीन लाख है। इसके अलावा यादव, राजपूत, पासी और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या भी काफी है।
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Updated on:
10 Apr 2019 02:24 pm
Published on:
10 Apr 2019 11:09 am
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