
ram vilas vedanti
नई दिल्ली। देश की सियासत में राम मंदिर का मुद्दा फिर से गर्माने लगा है। शुक्रवार को 40 संतों का एक दल दिल्ली पहुंचा है, जहां एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में राम मंदिर निर्माण को लेकर चर्चा हुई है। इस बैठक के खत्म होने के बाद पूर्व बीजेपी सांसद व राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास वेदांती ने भाजपा को धमकी दी है।
राम मंदिर पर नहीं आया अध्यादेश तो होगा आंदोलन- वेदांती
वेदांती ने भाजपा को 6 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिया है कि या तो जल्द अध्यादेश लाकर राम मंदिर का निर्माण कराया जाए, नहीं तो संत समाज उसके बाद आंदोलन करेगा। वेदांती ने कहा कि अगर सरकार ने हमारी नहीं सुनी तो कार सेवा कर मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। आपको बता दें कि 6 दिसंबर वहीं दिन है, जिस दिन अयोध्या में मस्जिद को ढहाया गया था। इस दिन को शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलेगा संतों का एक दल
बैठक खत्म होने के बाद रामविलास वेदांती ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून नहीं बनाती है तो कारसेवा के जरिए एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वेदांती के इस बयान से साफ है कि जिस तरह कारसेवा कर मस्जिद को ढहाया गया था, ठीक उसी तरह संत समाज मंदिर निर्माण के रास्ते पर भी विचार कर रहा है। आपको बता दें कि दिल्ली पहुंचा संतों का ये दल आज शाम को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करने वाला है और उन्हें एक राम मंदिर से संबंधित ज्ञापन सौंपेगा।
एससी-एसटी एक्ट और तीन तलाक पर अध्यादेश तो राम मंदिर पर क्यों नहीं?
संतों की उच्चाधिकार समिति के साथ बैठक में कई संतों ने राम मंदिर के निर्माण पर केंद्र सरकार के रूख पर नाराजगी जताई और कहा कि अगर केंद्र सरकार अगर कोर्ट में लंबित होने के बाद एससी/एसटी अट्रोसिटी एक्ट को संसद से कानून बना सकती है, तीन तलाक बिल पर अध्यादेश ला सकती है तो राम मंदिर के निर्माण के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता।
अध्यादेश के जरिए मंदिर निर्माण की मांग कर रहा है संत समाज
दिल्ली में आज राम मंदिर को लेकर विश्व हिंदू परिषद की अध्यक्षता में ये मीटिंग हुई है, जिसमें अध्यादेश के जरिए मंदिर निर्माण को लेकर चर्चा हुई है। संतों की मांग है कि सरकार को इस संबंध में संसद के शीतकालीन सत्र में बिल लाना चाहिये। वीएचपी के संत समागम में संतों ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण एनडीए सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। संतों ने कहा कि आस्था के विषय को आप कानून के दर पर दस्तक देकर हासिल नहीं कर सकते हैं।
आपतो बता दें कि फिलाहल ये मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, जिसको लेकर 29 अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट रोजाना सुनवाई करने जा रहा है।
Published on:
05 Oct 2018 05:26 pm
बड़ी खबरें
View Allराजनीति
ट्रेंडिंग
