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ये है भाजपा-जेडीयू के बीच ‘बड़े भाई’ को लेकर मचे सियासी घमासान का असली सच

बिहार में सत्‍ताधारी गठबंधन भाजपा-जेडीयू के बीच मचे घमासान का सच अब सामने आने लगा है।
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Dhirendra Kumar Mishra

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Jun 05, 2018

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ये है भाजपा-जेडीयू के बीच 'बड़े भाई' को लेकर मचे सियासी घमासान का असली सच

नई दिल्‍ली। आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर राष्‍ट्रीय राजनीति के साथ अब बिहार में सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है। अंतर केवल इतना है कि जहां राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पीएम मोदी बनाम विपक्षी दल के बीच घमासान मचा है वहीं बिहार में भाजपा गठबंधन के बीच ही तकरार शुरू हो गया है। चुनाव नजदीक आते ही एनडीए के सहयोगी जेडीयू, लोजपा व अन्‍य पार्टियां भाजपा को आंख दिखाने लगे हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर शिवसेना के बाद अब जेडीयू के तेवर भी तल्ख हो गए हैं। रविवार को जेडीयू की हुई बैठक के बाद ये तल्‍खी खुलकर सबके सामने आ गया है। हालांकि इस तल्‍खी को थामने का शुरू हो गया है।

तकरार की वजह क्‍या है?
पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर रविवार को जेडीयू कोर कमेटी की बैठक हुई। इस बैठक के बाद जेडीयू ने पहली बार सीटों को लेकर अपनी बात रखी। जेडीयू ने 2019 में 25 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की है जबकि भाजपा को महज 15 सीटें देनी की बात कही है। जेडीयू ने तय किया है कि राज्य में एनडीए गठबंधन का चेहरा भी सीएम नीतीश कुमार ही होंगे। इस मामले में जेडीयू अपनी ताकत 2009 के हिसाब से आंक कर चल रही है। जेडीयू नेताओं का यही रुख तकरार का कारण भी है। आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में बिहार की 40 लोकसभा सीटों में एनडीए ने 31 सीटें जीती थी। एनडीए की 31 सीटों में से भाजपा को 22 सीटें, पासवान की एलजेपी को 6 और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी को 3 सीटें मिली थीं। दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी को सिर्फ 4 तो नीतीश की पार्टी जेडीयू को 2 सीट मिलीं। कांग्रेस को भी 2 सीट मिलीं और एनसीपी को एक। इसके बावजूद जेडीयू का ये कहना कि उसकी हैसियत 2009 के हिसाब से आंकी जाए भाजपा हाईकमान को हजम नहीं हो रहा है।

सीट शेयरिंग को लेकर कोई कन्‍फ़यूजन नहीं
जेडीयू नेता अजय आलोक का कहना है कि सीट शेयरिंग को लेकर जेडीयू में कोई कन्फ्यूजन नहीं है। हम अब तक 25 सीटों पर चुनाव लड़ रहे थे और भाजपा 15 सीटों पर लेकिन अब कुछ सहयोगी पार्टियां भी हमसे जुड़ गई हैं। तो अब सीट शेयरिंग को लेकर सीनियर नेता फैसला करेंगे। जहां तक बात एनडीए गठबंधन के बड़े भाई की भूमिका की है तो भाजपा नेता भी बिहार में नीतिश को बड़ा मानते हैं। इसलिए बड़े भाई के मुद्दे पर बहस के लिए कोई स्‍थान ही नहीं है।