
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बताई हिंदू संस्कृति की विशेषता, मदरसों में भी पढ़ाया जाए भारतीयता का पाठ
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मदरसों को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। उन्होने कहा कि देश के मदरसों में भारतीयता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। मदरसों में ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जो धर्मों के बीच कोई भेदभाव नहीं करती हो और शांति को बढ़ावा देती हो। आपको बता दें कि मोहन भागत बुधवार को देहरादून में अपने चार दिवसीय प्रवास के दौरान रिटायर्ड अधिकारियों से बात कर रहे थे। संघ प्रमुख ने भगवान राम और 'गो माता' को हिंदू संस्कृति का आधार बताया।
भागवत ने कहा कि हर भारतीय को यह समझने की जरूरत है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण मूल स्थान पर ही किया जाना चाहिए। संघ प्रमुख ने कहा कि भगवान राम में हमारी श्रद्धा है। जबकि गाय माता और राम हिंदू संस्कृति की बुनियाद हैं। ऐसे में मंदिर निर्माण होने से हिंदुत्व की पहचान समूची दुनिया में स्थापित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम अपनी पूजा अर्चना की पद्धति को अपनाने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। लेकिन उन्हे जानना चाहिए है कि हम सब एक ही पूर्वज की संतान हैं और इसका आधार एक ही देश और संस्कृति से जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि सामूहिक सोच से ही सशक्त समाज और देश के निर्माण का रास्ता निकता है।
संघ प्रमुख ने दावा किया कि भारत समेत अफगानिस्तान और पाकिस्तान की आबादी के पूर्वज एक ही हैं। हमाने पूर्वज एक ही संस्कृति से जुड़े हैं। भागवत ने कहा कि इस्लाम धर्म में संगीत बैन है, लेकिन पाकिस्तान और अफगानिस्तान में कव्वाली गाई जाती है। वहीं इस्लाम में निषेण मूर्ति पूजा इन मुल्कों के इबादतगाह में की जाती है। यही भारतीय संस्कृति की असली पहचान है।
Updated on:
07 Feb 2019 01:14 pm
Published on:
07 Feb 2019 12:08 pm
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