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महाराष्ट्रः छत्रपति शिवाजी के वंशज संभाजी राजे ने पीछे खींचे कदम, अब नहीं लड़ेंगे राज्यसभा चुनाव

राज्यसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र से निर्दलीय नामांकन कर चुके छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज संभाजी राजे ने अब अपना नामांकन वापस ले लिया है। उन्होंने यह फैसला तब लिया जब उन्हें समर्थन देने वाली पार्टियों ने बाद में उनसे किनारा कर लिया था।

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Sambhaji Raje withdrawing his Nomination for Rajya Sabha Elections

महाराष्ट्र की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां से राज्यसभा चुनाव के लिए निर्दलीय मैदान में उतरने का ऐलान कर चुके भाजपा के पूर्व सांसद और छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज संभाजी राजे ने अब अपने कदम पीछे खींच लिया है। उन्होंने राज्यसभा चुनाव में नामांकन नहीं करने का फैसला कर लिया है। बता दें कि बीते दिनों भाजपा से अलग होकर उन्होंने निर्दलीय राज्यसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। शुरुआत में कई पार्टियों ने उन्हें सर्मथन देने की बात कही थी, लेकिन बाद में पार्टियों के यू-टर्न लेने के बाद संभाजी राजे ने भी अपना फैसला बदल लिया।

राज्यसभा चुनान से अपने कदम पीछे खींचने के पीछे संभाजी राजे ने हॉस ट्रेडिंग को कारण बताया है। संभाजी राजे ने कहा हॉस ट्रेडिंग पर लगाम लगाने के उद्देश्य से मैंने अपना नामांकन वापस ले लिया है। मैं शिवाजी का वंशज हूं और मेरी अपनी एक प्रतिष्ठा है। मैं महाराष्ट्र में स्वराज्य संगठन को मजबूत करूंगा। बताते चले कि बीते दिनों संभाजी ने निर्दलीय राज्यसभा चुनाव लड़ने का ऐलान करते हुए राज्य में स्वराज्य नामक एक संगठन बनाने की घोषणा की थी। इस संगठन के जरिए वो पूरे महाराष्ट्र की यात्रा कर छत्रपति शिवाजी और संभाजी के विचारों से लोगों को अवगत कराएंगे।

हॉस ट्रेडिंग को कारण बताकर भले ही संभाजी राजे ने राज्यसभा चुनाव से पीछे हटने का निर्णय लिया हो लेकिन जानकार बताते हैं कि उनके राज्यसभा पहुंचने की डगर काफी कठिन थी। इसलिए उन्होंने समय रहते अपने फैसले में बदलाव कर लिया। बता दें कि महाराष्ट्र में राज्यसभा की छह सीटों के लिए चुनाव होना है। इसमें छठी सीट से संभाजी राजे छत्रपति ने नामांकन किया था। शुरुआत में बीजेपी और एनसीपी ने उन्हें समर्थन देने का वायदा किया था। लेकिन बाद में इन दोनों दलों ने भी अपना फैसला बदल लिया था। जिसके बाद संभाजी राजे राज्यसभा पहुंचना लगभग असंभव था।

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बता दें कि संभाजी राजे मराठा समुदाय में काफी लोकप्रिय है। पिछले साल उन्होंने मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन भी चलाया था। वो मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वें वंशज है। राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने उन्हें समर्थन देने से इंकार कर दिया था। जबकि एनसीपी ने शुरुआत में समर्थन देने की बात कहकर यू-टर्न ले लिया था। बीजेपी और शिवसेना संभाजी के समर्थन को लेकर आमने-सामने थी। बाद में बीजेपी ने केद्रीय नेतृत्व का बहाना बनाकर किनारा कर लिया था। तो शिवसेना ने छठी सीट पर भी अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी थी।

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