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बड़ा सवालः शीला दीक्षित के निधन के बाद कौन होगा विकल्प, कांग्रेस के सामने संकट

Sheila Dikshit Death से कांग्रेस के सामने खड़ा हुआ बड़ा संकट शीला दीक्षित का विकल्प तलाशना Delhi Congress के लिए बड़ी चुनौती अगले साल होना है Delhi Assembly election
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Dheeraj Sharma

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Jul 21, 2019

sheila Dikshit

नई दिल्ली। दिल्‍ली की पूर्व मुख्‍यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्‍यक्ष शीला दीक्षित ( Sheila Dikshit Death ) का शनिवार दोपहर निधन हो गया। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर है। सबसे बड़ा झटका कांग्रेस पार्टी को लगा है। लोकप्रिय नेता का यों चला जाना पार्टी के लिए बड़ी क्षति है।

शीला दीक्षित ( Delhi former CM Sheila Dikshit ) के जाने से कांग्रेस के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। मुहाने पर खड़े दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी का कुशल नेतृत्व किसे सौंपा जाए, कांग्रेस के लिए इसका जवाब तलाशना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव होने में कुछ ही महीने शेष बचे हैं। ऐसे में अब कांग्रेस के सामने एक ऐसे नेता की तलाश बड़ी चुनौती है, जो पार्टी की जिम्‍मेदारी संभाल सके।

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गुटबाजी को खत्म करना

कांग्रेस को दिल्ली फतह करने के लिए ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो पार्टी में वरिष्ठ होने के साथ गुटबाजी को खत्म करने के साथ पार्टी को एकजुट कर आगे बढ़ा सके।

पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि पार्टी में वैचारिक मतभेद हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान ये मतभेद खुलकर सामने आए जब आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की बातें होने लगीं।

हालांकि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने शीला के नेतृत्व में दूसरा स्थान हासिल किया और पार्टी को फिर से सत्ता में लाने की उम्मीद जगाई।

शीला दीक्षित के नेतृत्व में पार्टी इन चुनौतियों को मैनेज करते हुए आगे बढ़ रही थी, लेकिन उनके निधन से बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

अजय माकन दे चुके इस्तीफा

शीला के विकल्प की बात करें तो इस दौड़ में अजय माकन वरिष्ठ नेता थे, लेकिन दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रमुख अजय माकन स्वास्थ्य आधार पर पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।

ऐसे में पार्टी के लिए उनके नाम पर विचार करना मुश्किल है।

लवली की भाजपा में वापसी

दिल्ली कांग्रेस में अरविंदर सिंह लवली का नाम भी काफी अहम था, लेकिन उन्होंने भी दोबारा भाजपा का दामन थाम कर इस नाम पर भी विराम लगा दिया।

हालांकि थोड़े समय बाद ही वे कांग्रेस में लौट आए, लेकिन उनके पार्टी के लिए उनके नाम को आगे बढ़ाना मुश्किल लगता है।

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वर्तमान नेताओं पर नजर

दिल्ली कांग्रेस में वर्तमान नेताओं की बात करें तो मौजूदा नेताओं में वो लोकप्रियता या फिर वरिष्ठता नहीं है जो शीला दीक्षित के कद के आस-पास हो।

तीन कार्यकारी अध्यक्षों की बात करें तो हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव और राकेश लिलोठिया का काम तो अच्छा रहा है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से पार्टी का चेहरा बनना मुश्किल लगता है।

जेपी अग्रवाल, एके वालिया और सुभाष चोपड़ा नेता तो वरिष्ठ हैं, लेकिन मौजूदा राजनीति में इतने सक्रिय नहीं लगते कि पार्टी उन्हें विधानसभा चुनाव की कमान सौंपे।

कुल मिलाकर शीला दीक्षित के निधन ने कांग्रेस के सामने ऐसा संकट खड़ा किया है जिससे पार पाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।