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महाभियोग की आड़ में राम मंदिर मसले को आगे के लिए टालना चाहती है कांग्रेस: वसीम रिजवी

महाभियोग प्रस्‍ताव खारिज होने के साथ संवैधानिक संस्‍थाओं के खिलाफ कांग्रेस का राज भी खुलकर सामने आ गया है।

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wasim rizwi

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग का प्रस्‍ताव खारिज होने के बाद उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैय्यद वसीम रिजवी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्‍होंने बयान जारी कर बताया है कि भारत के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देकर कांग्रेस ने गलत पंरपरा की शुरुआत की है। ऐसा कर कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम कट्टरपंथियों का समर्थन करके हिंदू समाज की आस्था को नुकसान पहुंचाया है। महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने के पीछे हकीकत यह है कि कांग्रेस राम मंदिर मामले को 2019 तक के लिए टालना चाहती है।

देश को बांटने की साजिश
वसील रिजवी ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और चर्चित वकील कोर्ट में इस बात की मंशा पहले ही जाहिर कर चुके हैं कि राम मंदिर मसले की सुनवाई साल 2019 तक के लिए रोक दी जाए। ऐसा इसलिए कि राम मंदिर निर्माण का मुद्दा भाजपा के एजेंडे में है। सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस के वरिष्‍ठ के इस दलील को खारिज कर दिया था। उसी का बदला कांग्रेस चीफ जस्टिस से महाभियोग का प्रस्‍ताव जारी कर लेना चाहती है। इसकी आड़ में कांग्रेस देश को बांटने की साजिश में जुटी है। उन्‍होंने सवालिया लहजे में कहा कि कौन नहीं जानता है कि कांग्रेस ने ही विवादित स्थल का ताला खुलवाया था।

महाभियोग का नोटिस गलत
रिजवी का बयान राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू द्वारा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज करने के बाद आया है। आपको बता दें कि कांग्रेस की अगुवाई में सात विपक्षी पार्टियों ने उपराष्ट्रपति नायडू को महाभियोग प्रस्ताव का यह नोटिस सौंपा था। हालांकि संविधान विशेषज्ञों की राय के बाद वेंकैया नायडू ने कांग्रेस के प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया। उनके इस निर्णय के बाद से कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता कपिल सिब्‍बल ने बयान दिया कि वो दीपक मिश्रा की कोर्ट में कभी नहीं जाएंगे। इससे पहले सभापति वेंकैया नायडू ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि मुख्य न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के खिलाफ लाया गया यह महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस न ही उचित है और न ही अपेक्षित है। महाभियोग प्रस्ताव को लाते हुए हर पहलू को ध्यान में रखना चाहिए। इस खत पर कानूनी राय लेने के बाद ही इस नोटिस को खारिज किया जाता है।