शिवसेनाः सामना की एडिटर बनीं रश्मि ठाकरे, उद्घव को CM बनाने में रहा अहम याेगदान

  • पार्टी की महिला विंग में एक्टिव रहती हैं रश्मि ठाकरे
  • रश्मि को जाता है उद्धव को राजनीति में लाने का श्रेय
  • राजनीति में धीरे-धीरे बढ़ाई सक्रियता

By: Dhirendra

Updated: 01 Mar 2020, 12:57 PM IST

नई दिल्ली। लंबे अरसे से पर्दे के पीछे शिवसेना के लिए काम कारने वाली और उद्घव ठाकरे को राजनीति में लाने वाली रश्मि ठाकरे ने अब शिवसेना के मुखपत्र सामना की संपादक के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। अभी तक इस काम को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे देख रहे थे। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत सामना के कार्यकारी संपादक के रूप में पहले की तरह काम करते रहेंगे।

बता दें कि बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ने का फैसला हो या एनसीपी-कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का, ये तमाम फैसले शिवसेना ने सोची समझी रणनीति के तहत लिए हैं। लेकिन शिवसेना की इन तमाम रणनीतियों को तैयार करने में जिस रणनीतिकार की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो हैं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे। महाराष्ट्र के सीएम पद के लिए उद्धव ठाकरे की सहमति के पीछे भी रश्मि ठाकरे का हाथ माना जा रहा है।

सीएम उद्घव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे लंबे अरसे से पर्दे के पीछे से शिवसेना के चाल-चलन, चरित्र को तय करती रहीं हैं। वह शिवसेना में पर्दे के पीछे रहकर अपनी पकड़ बनाए रखती हैं। साथ ही उद्धव ठाकरे को सक्रिय राजनीति में लाने के पीछे भी रश्मि ही थीं। आदित्य ठाकरे को चुनाव लड़वाने के पीछे भी रश्मि ठाकरे का ही दिमाग काम कर रहा था। रश्मि ठाकरे का पार्टी काडर के साथ लगातार जुड़े रहना,पार्टी के महिला विंग में एक्टिव होकर काम करने और सियासी उठापटक के बीच परिवार को संभालने की कला ने उन्हें शिवसेना का फ्रंट रनर बनाया है।

रश्मि की उद्धव ठाकरे से पहली बार मुलाकात मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में हुई थी। इसी कॉलेज में उद्धव और रश्मि का इश्क परवान चढ़ा और कुछ समय बाद वह ठाकरे परिवार की बहू बन गईं। शादी के शुरुआती दो साल में ही रश्मि और उद्धव ठाकरे परिवारिक घर ‘मातोश्री’ छोड़कर एक अलग फ्लैट में रहने लगे। लेकिन फिर बाद में उद्धव और रश्मि मातोश्री लौट आए। परिवार के अंदर भी रश्मि ने अपनी अच्छी पकड़ बनाई।

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इससे पहले बाला साहेब की सबसे बड़ी बहू स्मिता ठाकरे की एक जमाने में ठाकरे परिवार में अच्छी पैठ थी। ये दौर था 1995 का, जब पहली बार महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार बनी थी। लेकिन रश्मि के एक्टिव होने बाद स्मिता ठाकरे का जादू धीरे-धीरे कम होता गया। बाल ठाकरे शिवसेना के सर्वेसर्वा थे और सबको ऐसा ही लगता था कि उनके राजनीतिक वारिस तब शिवसेना में सक्रिय रूप से काम करने वाले उनके भतीजे राज ठाकरे होंगे। लेकिन रश्मि ठाकरे की ही सोच थी कि बाल ठाकरे की विरासत उन्हीं के परिवार में रहनी चाहिए। तभी बाल ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को ही अपना वारिस बनाया और शिवसेना की कमान सौंपी।

इसके बाद ठाकरे परिवार में फूट हुई और राज ठाकरे ने घर छोड़ दिया और अपनी नई पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) खड़ी की। बाल ठाकरे को उद्धव के लिए मनाना और परिवार-पार्टी में उद्धव के लिए जगह बनाने में रश्मि ठाकरे की खासी भूमिका मानी जाती है। नारायण राणे के पार्टी छोड़ने का कारण उद्धव से मनमुटाव बताया जाता है लेकिन इसके पीछे मुख्य वजह रश्मि ठाकरे का पार्टी के कामकाज में दखल देना था।

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बेटे आदित्य ठाकरे को 19 साल की उम्र यानि 2010 से ही राजनीति में लाने का श्रेय भी रश्मि को ही जाता है। आदित्य, ठाकरे परिवार के ऐसे पहले सदस्य हैं जिन्होंने चुनाव लड़ा है। माना जा रहा है कि आदित्य को विधायकी का चुनाव लड़ाने के पीछे भी रश्मि की ही रणनीति काम कर रही थी। रश्मि ने आदित्य ठाकरे के प्रचार में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। रश्मि पार्टी की महिला इकाई में भी उनकी सक्रिय भूमिका रहती है। रश्मि खुद तो सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं हैं लेकिन उद्धव ठाकरे के ट्टिटर अकाउंट पर नजर डालने पर दिखता है कि वो रश्मि के साथ अपने राजनीतिक कामों को जमकर शेयर करते हैं।

इतना ही नहीं महाराष्ट्र में कई लोग रश्मि को सिर्फ बाला साहेब ठाकरे की बहू या नवनिर्वाचित विधायक आदित्य की मां के रूप में जानते हैं लेकिन उनके पास अच्छा राजनीतिक कौशल है। इस कौशल का इस्तेमाल वह 2005 से करती आई हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि निश्चित रूप से शिवसेना में रश्मि ठाकरे की अहम हिस्सेदारी है।

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान बेटे आदित्य को महाराष्ट्र के सबसे युवा मुख्यमंत्री के रूप में देखने की आकांक्षा भी रश्मि की ही थी। आदित्य के चुनाव जीतने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में 29 वर्षीय आदित्य ठाकरे को प्रोजेक्ट करने वाले वर्ली विधानसभा क्षेत्र एवं शहर के कई हिस्सों में पोस्टर लगाए गए थे। शिवसेना कैंप के संभावित सीएम उम्मीदवार आदित्य से उद्धव ठाकरे में बदल गए। बता दें कि जब उद्धव ठाकरे के नाम को महा विकास अघाड़ी ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी थी तब रश्मि बुधवार को सुबह अपने पति के साथ राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिली थीं।

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