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कांग्रेस अलाकमान ने मेरी सलाह को किया नजरअंदाज, मिली हार: सिद्धरामय्या

जद-एस के साथ गठबंधन के कारण गंवाए 7 से 8 सीटपता था एक-दूसरे को नहीं मिलने वाले पारंपरिक मत

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कांग्रेस अलाकमान ने मेरी सलाह को किया नजरअंदाज, मिली हार: सिद्धरामय्या

कांग्रेस अलाकमान ने मेरी सलाह को किया नजरअंदाज, मिली हार: सिद्धरामय्या

बेंगलूरु.
लोकसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने जनता दल-एस के साथ हुए गठबंधन को दोषी ठहराया है। पिछले वर्ष के आम चुनावों में मिली हार के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पहली बार इस तरह का बयान दिया है जिसमें अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी अलाकमान को भी उनका सुझाव नहीं मानने के लिए कटघरे में खड़ा किया।

यहां बुधवार को उन्होंने कहा कि जद-एस के साथ गठबंधन आवश्यक नहीं था। इसके चलते पार्टी को सात से आठ सीटें गंवाने का खामियाजा भुगतना पड़ा। पार्टी अलाकमान ने अकेले चुनाव लडऩे के उनके सुझाव पर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वे पार्टी में 'इकलौती आवाजÓ थे। अकेले चुनाव लडऩे के मुद्दे पर उनका समर्थन करने वाला पार्टी में दूसरा कोई नहीं था।

कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धरामय्या ने कहा कि मैसूरु क्षेत्र में कांग्रेस-जद-एस एक-दूसरे के खिलाफ पिछले कई वर्षों से लड़ते आ रहे हैं। इसलिए गठबंधन की कोई आवश्यकता नहीं थी। दरअसल, पिछली 2 जुलाई को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के पदभार संभालने के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव द्वारा उठाए गए सवालों का सिद्धरामय्या जवाब दे रहे थे। उन्होंने दावा किया कि अगर कांग्रेस ने जद-एस के साथ गठबंधन नहीं किया होता तो पार्टी 7 से 8 सीटें जीत सकती थी।

लोकसभा चुनावों में हार की वजह पर खुलकर कहा कि 'मुझे पता था कि दोनों ही पार्टियां अपने पारंपरिक वोट एक-दूसरे को नहीं दिला पाएंगी। कांग्रेस को जद-एस का वोट नहीं मिलने वाला और जद-एस को भी कांग्रेस का वोट नहीं मिलने वाला था।Ó यह पूछे जाने पर आलाकमान ने उनकी बात क्यों नहीं मानी नेता प्रतिपक्ष ने कहा 'मैं अकेला आवाज था।'

दरअसल, गुंडूराव ने कहा था कि जब वे प्रदेश अध्यक्ष बने तब पार्टी गठबंधन का दर्द झेल रही थी। पार्टी लोकसभा चुनावों में उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई क्योंकि जनता ने कांग्रेस-जद-एस गठबंधन को पसंद नहीं किया। जिस तरीके से सरकार चल रही थी वह आम जनता के उम्मीदों के विपरीत था। सरकार की कार्यप्रणाली से जनता खुश नहीं थी। गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को राज्य की 28 सीटों में से सिर्फ एक सीट पर ही जीत मिली थी।

लोकसभा चुनावों में हार के बाद पार्टी के भीतर बगावत शुरु हो गया और गठबंधन सरकार के 17 विधायकों ने एक-के-बाद एक इस्तीफा दे दिया। इससे सरकार गिर गई और राज्य में बीएस येडियूरप्पा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार का गठन हुआ। बागी विधायक भाजपा में शामिल हुए और भाजपा की टिकट पर उपचुनाव जीतकर मंत्री बने।