5 राज्यों में मतदान समाप्त हो गए हैं। अब तीन दिसम्बर को नतीजों का इंतजार है इसी बीच मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में हुए विधानसभा चुनावों को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के एग्जिट पोल जारी किए गए हैं , जिसके जरिए अनुमान लगाया जा रहा है कि किस राज्य में किसकी सरकार बन सकती है.. तमाम एग्जिट पोल में 5 में 2 राज्यों में भाजपा और 2 में कांग्रेस की सरकार बनती दिख रही है…एक में क्षेत्रीय पार्टी सबसे बड़ी पार्टी की ओर बढ़ती दिख रही है… हालांकि पिछले चुनावों में एग्जिट पोल के परिणाम विश्वसनीय नहीं रहे हैं. माना जाता है कि एजेंसियां देश के आम मतदाता तक नहीं पहुंच पाती.और मतदाता भी अपने मत के बार में खुलकर नहीं बोलते यही कारण है कि एग्जिट पोल वास्तविक परिणामों के आसपास नहीं पहुंच पाते .
अब आपको बताते हैं ये एग्जिट पोल होते कैसे हैं।
दरअसल विभिन्न एजेंसिया तीन चरणों में एग्जिट पोल को करती है ….इसमें सबसे पहले
1. प्री पोल – यानी ये सर्वे चुनाव तारीखों की घोषणा के बाद और वोटिंग से पहले किया जाता है .
2. एग्जिट पोल – यह सर्वे वोटिंग के दिन पोलिंग बूथ के बाहर किया जाता है इसमें वोट देकर बाहर आने वाले लोगों से सवाल किया जाता है . उन्होंने किसे और क्यों वोट दिया
3.पोस्ट पोल – यह सर्वे वोटिंग के एक दो दिन बाद किया जाता है . इसमें जानने की कोशिश की जाती है कि किस तरह के वोटर ने किस पार्टी को वोट किया है
भारत में एग्जिट पोल के वास्तविता से दूर होने के तीन बड़े कारण भी हो सकते हैं
1- विशेषज्ञों के अनुसार करोड़ों की जनसंख्या में से हजार लोगों के रुझान को लेकर सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता है भले ही एग्जिट-ओपेनियन पोल एक विज्ञान है, लेकिन भारत में इसकी अलगप्रक्रिया अपनानी पड़ेगी…
2- हमारे देश में चुनाव कई लोकल फैक्टर से भी प्रभावित होते हैं खास कर जब बात राज्यों के चुनाव की हो । मसलन जाति-धर्म, राजनीतिक गठजोड़, ध्रूवीकरण जैसे मुद्दे . यहां मतदान के एक दिन पहले तक हुई कोई घटना या तथ्य मतदाता को प्रभावित कर सकता है…
3- एग्जिट-ओपेनियन पोल से हमें केवल परिणाम के संकेत मिलते हैं, यह वास्तविक नहीं होता. डेटा साइंटिस्ट मानते हैं कि इसे और वैज्ञानिकता के साथ करने की जरूरत है.