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10 साल में सांसदों ने 400 गुना वेतन बढ़ाया, भाजपा के गांधी ने उठाया सवाल

 भारतीय जनता पार्टी के वरुण गाधी ने कहा है कि पिछले एक दशक में सांसदों ने अपना वेतन 400 फीसदी बढ़ाया है, जबकि उनका काम उसके अनुरूप नहीं है। 
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lalit fulara

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Updated: 1 Aug 2017, 2:49 PM IST

Varun Gandhi

Varun Gandhi

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरुण गाधी ने पिछले एक दशक में सांसदों का वेतन 400 फीसदी बढ़ने का मुद्दा उठाते हुए मंगलवार को कहा कि उनके वेतन के नियमन के लिए एक बाह्य संवैधानिक संस्था के गठन किया जाना चाहिए। वरुण गांधी ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसे समय में जब तमिलनाडु में किसान आत्महत्या कर चुके अपने ही साथियों की खोपड़ी लेकर प्रदर्शन करने को विवश हैं, तब तमिलनाडु के विधायकों ने अपना वेतन बढ़ाकर दोगुना कर लिया है। उन्होंने कहा कि 1952 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में सांसदों ने तीन महीने तक वेतन नहीं लेने का फैसला किया था।

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वेतन के अनुरूप नहीं सांसदों का काम
वरुण ने कहा कि पिछले एक दशक में सांसदों ने अपना वेतन 400 फीसदी बढ़ाया है, जबकि उनका काम उसके अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल में संसद में पारित 50 फीसदी विधेयकों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया गया। इकतालीस प्रतिशत विधेयक तो बिना किसी चर्चा के पारित हो गए। उन्होंने कहा कि सांसदों के वेतन बढ़ोतरी का कोई आधार होना चाहिए। निजी क्षेत्र का उद्देश्य सिर्फ अपना मुनाफा देखना होता है। इसलिए हम उसके अनुरूप वेतन में बढ़ोतरी नहीं कर सकते। किसानों तथा देश के गरीब तबके प्रति संवेदना दर्शाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

varun gandhi in parliament के लिए चित्र परिणाम

वेतन तय करने के लिए गैर सांसदों की कमेटी बने
गांधी ने कहा कि ब्रिटेन में सांसदों के वेतन में बढ़ोतरी की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकरण है, जिसमें गैर-सांसद सदस्य होते हैं। हमारे देश में भी ऐसा कोई तंत्र बनना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि इसके लिए एक बाह्य संवैधानिक संस्था का गठन किया जाए। यदि सांसद स्वयं अपना वेतन तय करते हैं तो इसमें ज्यादा जिम्मेदारी बरती जाए।

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