18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देश में जो अब हो रहा है, वह दुखद : गुलजार

उन्होंने कहा,किसी ने कभी कल्पना नहीं की होगी कि किसी का नाम पूछने से पहले उसका मजहब के बारे में पूछा जाएगा

less than 1 minute read
Google source verification

image

Jameel Ahmed Khan

Oct 24, 2015

Gulzar

Gulzar

नई दिल्ली। मशहूर लेखक, गीतकार और निदेशक गुलजार ने वर्तमान माहौल को लेकर लेखकों
के विरोध पर चुप्पी तोड़ते हुए आज कहा कि देश में "भय" और "अनिश्चितता" का माहौल
है। उन्होंने लेखकों के विरोध का समर्थन किया लेकिन पुरस्कार लौटाने को अनुचित
बताया। एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, देश में ऎसा माहौल पहले नहीं देखा
गया। अभिव्यक्ति की आजादी कम से कम हमेशा रही है। किसी ने कभी कल्पना नहीं की होगी
कि किसी का नाम पूछने से पहले उसका मजहब के बारे में पूछा जाएगा।

देश के
मौजूदा हालात पर लेखकों के विरोध का उन्होंने समर्थन किया, लेकिन साथ ही उन्होंने
कहा कि साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का उनका निर्णय ठीक नहीं है। इस निर्णय की
आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, साहित्य अकादमी एक स्वायत्त संस्था है और उसके
पुरस्कार को लौटाना समस्या का समाधान नहीं है। सरकार की तरफ से पुरस्कार दिए जाते
हैं उन्हें लौटाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार अकादमी पर ही
कब्जा कर लेगी तो कोई क्या कर सकता है। लेखकों के विरोध को राजनीति करने के आरोप को
खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि कोई लेखक राजनीति कैसे कर सकता है। लेखक समाज के
सचेतक होते हैं और वे सिर्फ अपनी आत्मा की आवाज पर विरोध जता रहे हैं।

ये भी पढ़ें

image