
नई दिल्ली। भाजपा के फायरब्रांड नेता शत्रुघ्न सिन्हा पिछले कई महीनों से अपनी पार्टी से नाराज चल रहे हैं।'बिहारी बाबू' और 'शॉटगन' के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा आए दिन अपनी पार्टी और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जमकर हमला कर रहे हैं। पीएम मोदी का ऐसा कोई भी बयान जो विपक्ष के नेताओं पर होता है, वह शत्रुघ्न सिन्हा के प्रतिउत्तर का पात्र जरूर बनता है।
'शत्रु' के निशाने पर मोदी
शत्रुघ्न सिन्हा के बयानों से यह साफ जाहिर होता है कि वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधने से नहीं चूक रहे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा आज कल अपने हर राजनीतिक इंटरव्यू या बयान में विरोधियों से ज्यादा अपनी ही पार्टी की बखिया उधेड़ रहे हैं। हाल में ही यशवंत सिन्हा के भारत निर्माण मंच के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने पार्टी को ललकारते हुए कहा था कि हिम्मत है तो शीर्ष नेतृत्व उन्हें भाजपा से निकलकर दिखाए।
दिल्ली विधानसभा चुनावों से भाजपा के खिलाफ मुखर रहे सिन्हा के बयान दिन पर दिन बेहद तल्ख़ होते जा रहे हैं। हालत यह है कि वह पीएम मोदी पर हमला करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। अपने ताजा बयान में उन्होंने पीएम मोदी द्वारा राहुल गांधी पर दिए गए नामदार वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि नामदार हो या कामदार, अपने कर्मों से कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है।
खुलकर पंगे ले रहे हैं शत्रुघ्न सिन्हा
शत्रुघ्न सिन्हा के पिछले कुछ दिनों के बयानों पर गौर करें तो पता चलता है कि भाजपा और पीएम मोदी पर उनके बयानों की तल्खी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। ऐसा लगता है जैसे शत्रुघ्न सिन्हा चाहते हों कि पार्टी नेतृत्व उनके खिलाफ कोई एक्शन ले । लेकिन अभी 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी कोई खतरा उठाने के मूड में नहीं दीख रही है। पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का प्रभाव बिहार के कायस्थ और भूमिहार वर्ग के मतदाताओं में खासा अधिक है। इसलिए भाजपा अपने कदम बेहद सावधानी से रख रही है। पार्टी यह जाता रही है कि शत्रुघ्न सिन्हा को लेकर वह कोई जल्दबाजी के मूड में नहीं है।
क्यों नाराज हैं 'बिहारी बाबू'
लेकिन असल सवाल अब भी बाकी है कि 'बिहारी बाबू' शत्रुघ्न सिन्हा नाराज क्यों हैं। भाजपा सूत्रों की माने तो सिन्हा की नाराजगी के दो प्रमुख कारण हैं। पहला तो यह कि केंद्र की मोदी सरकार में उन्हें मंत्री पद चाहिए था। दूसरा उन्हें पार्टी के फैसलों में कमतर महत्व दिया गया है। इसके अलावा वह यह भी चाहते थे कि मोदी सरकर उन्हें 'पद्म विभूषण' दे, और इसके लिए उन्होंने बिहार की जीतमराम मांझी सरकार से अपने नाम की सिफारिश करवाई थी, प्रधानमंत्री के खिलाफ किये गए उनके तंज और आडवाणी के उनके करीबी संबंध उन पर भारी पड़ गए।
Published on:
13 May 2018 02:18 pm

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