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नरेगा में मिला काम, आधे ही बने आवास

ओडीएफ तो हो गई सभी ग्राम पंचायतें

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pratapgarh

नरेगा में मिला काम, आधे ही बने आवास

गांवों में सफाई नहीं होने से फैली है गंदगी
देवीशंकर सुथार
प्रतापगढ़ जिले में सरकार की ओर से गांवों को स्मार्ट बनाने की योजना आधी ही सफल हुई है। गांवों के विकास के लिए बनी तीन महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छता अभियान की कसौटी पर गांवों के स्मार्टनैस को देखें तो पहली दो योजनाओं में कुछ काम होता दिखाई दे रहा है, लेकिन स्वच्छता अभियान में गांव बहुत पीछे हैं। गरीबों के लिए आवास योजना और नरेगा के कारण लोगों के रहन-सहन में बदलाव जरूर आया है। गांवों में कच्चे झौंपड़े अब कम हो रहे है, इसका स्थान पक्के मकान ले रहे हैं। मनरेगा में रोजगार के कारण गांवों से शहरों की ओर पलायन भी थोड़ा बहुत रुका है, लेकिन सफाई के मामले में गांवों में कोई अंतर नहीं आया है। गांवों में न तो अभी ग्रामीणों में जागरूकता आई है और न ही ग्राम पंचायतें इस दिशा में काम कर रही हैं।
पिछले दस साल में गांवों में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए पत्रिका टीम ने आसपास के गांवों का दौरा किया तो ये सच्चाई सामने आई। इसे ‘कितना स्मार्टबना मेरा गांव’ नाम से यहां पेश किया जा रहा है। पहले दिन पेश है सालमगढ़ गांव की रिपोर्ट -
2008 में मात्र तीन आवास, इस वर्ष84
निरंतर सफाई की आवश्यकता
सालमगढ़
केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण फ्लेगशिप योजनाओं में से प्रमुख मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास के अंतर्गत ग्राम पंचायत सालमगढ़ में वर्ष 2008 में 3 इंदिरा आवास स्वीकृत हुए थे। वहीं वर्ष 2017-18 में 8 4 आवास स्वीकृत हुए हैं।जहां 2008 में लाभार्थियों को 50 हजार रुपए की सहायता दी जाती थी।वहीं अब पीएम आवास योजना अंतर्गत 1 लाख 20 हजार रुपए प्रार्थी के बैंक खाते में जमा हो रहे है।वहीं शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार एवं नरेगा से 17 हजार 28 0 रुपए दिए जा रहे हैं।आवास निर्माण से लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।वर्तमान में ग्राम पंचायत ओडीएफ घोषित हो चुकी है।शौचालय इस्तेमाल से गंदगी लगभग समाप्त हो चुकी है। हालांकि ग्राम पंचायत द्वारा सफाई कर्मी लगातार सफाई कर रहे हैं। परंतु सफाई कार्य में निरंतरता का अभाव है।नालियों की सफाई नियमित नहीं होती है।साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर मंत्रालय का अभाव है।नए बस स्टैंड पर स्थित मुख्यालय में नियमित सफाई नहीं होती है।मनरेगा में जो कार्य हो रहे हैं।ज्यादातर कच्चे कार्य होने से उनका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।नरेगा को व्यक्तिगत लाभ के कार्यों से जोडऩे पर जरूर कार्य हो रहे हैं।
सुमित्रा कुंवर का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान मिलने से पहले मेरा परिवार कच्चे मकान में निवास करता था। आवास योजना में मेरे परिवार को पक्का मकान भी मिला साथ में शौचालय भी बनाया गया है।
गांव के निलेश पटवा का कहना है कि गांव में नालियों के अभाव के कारण नालियों का पानी बाजार में भरा हुआ है।जिससे मच्छर फैलते हैं।बीमारियों की संभावना रहती है।नारायणसिंह चौहान ने बताया कि गांव में नियमित सफाई नहीं होने से नालियां कचरो से भरी हुई है।
करा रहे हैसफाई
अभी स्वच्छता के लिए गांव में सफाईकर्मी लगा रखे हैं। कुछ और सफाईकर्मी की नियुक्ति भी की जाएगी। इसके अलावा कचरा वाहन भी लगाने की तैयारी ग्राम पंचायत की ओर से की जा रही है। आवश्यक जगह पर नाली निर्माण का कार्य किया जा रहा है।
प्रकाश मीणा
सरपंच, सालमगढ़

आंकड़ों की नजर में तीनों योजनाएं
प्रधानमंत्री आवास योजना
जिले में गत तीन वर्षों में कुल 28 हजार 927 आवास स्वीकृत हुए थे। इनमें से 13 हजार 562 आवास ही पूर्ण हुए है। यानि लक्ष्य का आधा भी काम पूरा नहीं हुआ। इनमें से केन्द्र से मिलने वाली प्रथम किस्त के कारण 1341, द्वितीय किस्त के कारण 7 हजार 10 और 13891 आवास तीसरी किस्त के कारण अधूरे है।
वहीं इंदिरा गांधी आवास योजना में वर्ष2011-12, 2012-13 और 2013-14 में स्वीकृति आवास भी अब तक अधूरे है। इनमें अरनोद में 310, छोटीसादड़ी में 373, धरियावद में 1899, पीपलखूंट में 2658 और प्रतापगढ़ में 858 आवास अधूरे है।

यह गांव बना रहे स्मार्ट
जिले में तीन हजार से अधिक आबादी वाले गांवों को स्मार्ट विलेज बनाया जा रहा है। इनमें धरियावद ब्लॉक में 15, पीपलखूंट में पांच, छोटीसादड़ी में चार, प्रतापगढ़ में तीन और अरनोद में तीन गांवों को लिया गया है। इन गांवों में विभिन्न सुविधाओं के लिए 38 करोड़ 33 लाख रुपए की स्वीकृति हुई है। इनमें से 14 करोड़ 66 लाख रुपए व्यय हो चुके है।

नरेगा में मिला काम
जिले में इस वर्ष नरेगा में रोजगार भी दिया गया है। जिसमें एक लाख 83 हजार 469 परिवारों में से एक लाख एक हजार 522 परिवारों ने रोजगार की मांग की। जिसमें एक लाख एक हजार 374 को रोजगार दिया गया। जिसमें 30 लाख 38 हजार मानव दिवस को 43 करोड़ 73 हलाख 78 हजार रुपए का भुगतान किया गया।
होगा सर्वांगीण विकास
जिले के गांवों में मूलभूत सुविधाओं के लिए हम विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है। सर्वांगीण विकास के लिए प्रयास किए जा रहे है। जिले की सभी 195 ग्राम पंचायतें ओडीएफ हो चुकी है। सभी ग्राम पंचायतों में सॉलिड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट (एसएलआरएम) के तहत गीला और सूखा कचरा संग्रहण के लिए केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। साइकिल रिक्शा चलाए जाएंगे। नालियाों का निर्माण किया जाएगा। सफाई व्यवस्था और भी पुख्ता की जाएगी। इसके लिए डीवीआर तैयार कराई जा रही है।
डॉ. वीसी गर्ग
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिष