
नहीं हो रहा पशुओं का समय पर बीमा
प्रतापगढ़. गत दिनों लंपी रोग ने प्रदेश के कई जिलों में जमकर कहर बरपाया है। इसमें कई मवेशी काल का ग्रास भी बने है। इस रोग के कारण मौत होने से पशुपालकों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तो दूधारू पशु की मौत के बाद कई पशुपालकों के सामने घर का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया। वहीं कई मवेशी अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे है। पशुपालकों की इस परेशानी को देखते हुए सरकार ने पशुपालकों को संबल प्रदान करते हुए गत वर्षों से बंद पशुधन बीमा योजना को फिर से शुरू की है। लेकिन जिले में योजना के तहत काफी लक्ष्य दिए गए है। इसके साथ ही एक ही एजेंट है। जिससे समय पर मवेशियों का बीमा नहीं हो रहा है। जिले में 12 सौ का लक्ष्य है। जो इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य के आधार पर बीमा किया जाना है। इसके मुकाबले अब तक मात्र 44 मवेशियों के ही बीमा हुए है।
गौरतलब है कि बीते दिनों मवेशियों में लंपी बीमारी से काफी पशुओं की मौत के बाद सरकार ने फिर से योजना शुरू की है। लेकिन लक्ष्य सीमित होने से सभी मवेशियों का बीमा नहीं होगा। जबकि जिले में वर्ष 2019 की पशुगणना के अनुसार पांच लाख 2 हजार मवेशी है। इस योजना के तहत पशुपालन विभाग के चिकित्सक पशुपालकों को संबंधित पशुओं के स्वस्थ होने का प्रमाण पत्र जारी कर रहे है। इसके बाद कंपनी प्रतिनिधि पशुओं का बीमा कर रहे है।
इस प्रकार होगा बीमा
पशुपालकों को बीमा कराने के लिए राहत प्रदान की है। बीमा कराने के लिए पशुपालकों को नजदीकी पशु चिकित्सा केन्द्र पर प्रभारी से सम्पर्क करना है। जहां पर वो अपने पशु का आसानी से बीमा करवा सकते है। हालांकि आवेदन पत्र, पशु का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, पशु के कान में लगे टैग सहित फोटो, बीपीएल कार्ड, एससीएसटी से संबंधित दस्तावेज की प्रति, बैंक का नाम, खाता संख्या, आईएफसी कोड, आधार कार्ड, प्रीमियम राशि पशुपालक को देनी होगी। संयुक्त निदेशक पशुपालन डॉ. श्रीनिवास सांवले ने बताया कि पशुपालकों को बीमा कराने के लिए प्रेरित करेंगे, योजना के तहत जल्द गांवों में शिविर लगाएंगे। ताकि योजना का लाभ मिल सके। जिले को 12 सौ यूनिट का बीमा का लक्ष्य दिया।
महंगे दाम देने से मिलेगा छुटकारा
करजू. राजकीय पशुचिकित्सालय करजू में अब कृत्रिम गर्भाधान के साथ पशुओं का बीमा भी किया जा रहा हैं। डॉ. उषाकुमारी ने बताया कि क्षेत्र के पशुओं का बीमा व कृत्रिम गर्भाधान स्थानीय पशु चिकित्सालय में किया जाएगा। जिससें पशुपालकों को झोला छाप चिकित्सकों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। इसके साथ ही महंगे दाम देने से भी छुटकारा मिलेगा।
बीमा के तहत 50 हजार का मिलेगा क्लेम
पशुधन बीमा योजना में एक यूनिट के बीमा पर सामान्य पशुपालक को बीमा राशि का 50 प्रतिशत तथा एससी व एसटी को 70 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। हालांकि इसमें पचास हजार रुपए का क्लेम देने का नियम है। इसमें दस भेड़ अथवा बकरी की एक यूनिट है। जबकि गाय व भैंस को एक-एक यूनिट माना है। यूनिट के हिसाब से पशुओं की मौत पर इसी अनुपात में बीमा राशि जारी की जाती है।
Published on:
10 Jan 2023 08:42 pm
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