
26 जनवरी 2008, यही वो दिन था जिस दिन प्रतापगढ़ जिला बना था। इस वर्ष 26 जनवरी को प्रतापगढ़ को जिला बने 10 वर्ष का समय हो जाएंगे। जिला बनने के बाद से अब तक जिले की सूरत काफी कुछ बदल चुकी है। इस दौरान कई विकास कार्य हुए, कई नए भवनों का निर्माण हुआ तो कई भवन निर्माणाधीन हैं। जिनके चलते जिला अपना आकार लेता नजर आ रहा है और इसकी सूरत बदल रही है और जिलेवासियों को सुविधाएं मिलने लगी है। वहीं जिले में अब भी कई विकास कार्यो की दरकार है। जिनके होने पर लोगों को और ज्यादा सुविधा मिल सकती है।
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10 साल दस उपलब्धियां
1. मिनी सचिवालय का निर्माण
प्रतापगढ़ के जिला बनने के बाद 22 अगस्त 2008 को मिनी सचिवालय भवन का शिलान्यास हुआ। मिनी सचिवालय में कलक्ट्रेट सहित विभिन्न विभागों के कार्यालय बनाए गए। 18 मई 2011 को मिनी सचिवालय का उद्घाटन हुआ और विभिन्न कार्यालयों को एक ही जगह स्थापित किया गया। जिससे लोगों को अपने कामकाज के लिए काफी सुविधा मिली। समय-समय पर यहां मिनी सचिवालय परिसर में जिला परिषद कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय आदि बड़े विभागों के कार्यालयों के लिए भी नए भवनों का निर्माण किया गया।
2. रोडवेज डिपो और बस स्टैंड खुला
जिले में परिवहन सेवा बढ़ाने की दृष्टि से जिला मुख्यालय पर रोडवेज डिपो और बस स्टैंड बनाया गया। 5 जुलाई 2015 को जिले में रोडवेज बस स्टैण्ड और डिपो का उद्घाटन किया गया। प्रतापगढ़ डिपो की बसों का संचालन शुरू हुआ। जिससे लोगों को राहत मिली। हालांकि अब भी यहां कई कमियां हैं जिन्हें दूर किया जाना बाकी है।
4. मातृ एवं शिशु चिकित्सालय का उद्घाटन
प्रसव एवं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 13 दिसम्बर 2016 को जिला मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय परिसर में मातृ एवं शिशु चिकित्सालय का उद्घाटन किया गया। हालांकि उद्घाटन के लम्बे समय बाद तक चिकित्सकों और संसाधनों की कमी के चलते यह शुरू नहीं हो पाया और वर्ष 2017 के आखिर में इसे शुरू किया जा सका।
5. प्रतापगढ़ में 94 करोड़ की पेयजल पुनर्गठन योजना शुरू
प्रतापगढ़ शहर में लम्बे समय से चली आ रही अनियमित जलापूर्ति की समस्या के समाधान के लिए 94 करोड़ की पेयजल पुनर्गठन योजना पर काम शुरू हुआ। प्रतापगढ़ शहर की मूल पेयजल योजना वर्ष 1955-56 में स्वीकृत हुई थी। जिसका वर्ष 1771-72 में प्रथम बार तथा वर्ष 1994-95 में द्वितीय बार 15 वर्ष के लिए पुनर्गठन किया गया था। जिसके अनुसार वर्ष 2010 में इसकी अवधि पूरी हो गई। वर्ष 2016 में 94 करोड़ की नई योजना की स्वीकृति मिली और वर्ष 2017 में इस योजना पर काम शुरू हुआ। जिसे वर्ष 2018 में पूरा करना है। योजना पूरी होने के बाद शहर को निर्बाध जल मिल सकेगा।
6. 554 गांवों की पेयजल समस्या के समाधान के लिए 918 .32 करोड़ मंजूर
जिले के ग्रामीण क्षेत्र के पेयजल संकट के समाधान के लिए 554 गांवों के लिए 918 .32 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृृति जारी की गई। इससे जिले के प्रतापगढ ब्लॉक के 272, अरनोद के 18 0 व पीपलखूंट ब्लॉक के 102 गांवों की पेयजल आपूर्ति की दिशा में काम होगा। यह परियोजना अब तक की सबसे बड़ी परियोजना है। इस योजना का मुख्य पेयजल स्त्रोत जाखम बांध ही रहेगा। परियोजना के माध्यम से 554 गांव एवं 302 ढ़ाणियां लाभान्वित होंगी।
7. जिला चिकित्सालय परिसर में नर्सिंग ट्रेनिग सेंटर का भी निर्माण किया गया। ट्रेनिंग सेंटर शुरू होने से यहां क्षेत्र के ही विद्यार्थी प्रशिक्षित होने लगे हैं। ऐसे में यहां के नर्सिंग छात्रों को बाहर नहीं जाना पड़ रहा।
8. कच्ची बस्ती में रहने वालों के लिए सौगात
कच्ची बस्ती में रहने वाले लोगों के लिए धरियावद रोड पर कलक्ट्री के सामने 15.82 करोड़ की लागत से 350 पक्के मकान बनाए गए। इनमें से 15 अगस्त 2009 से कब्जे किए हुए लोगों को 300 मकान पुनर्वास के तहत, 15 अगस्त 2009 के बाद कब्जे वालों को 50 मकान किराए पर दिए जाएंगे।
9. शहर के निकट भंवर सेमला बांध का निर्माण हुआ। इस बांध के बनने से जहां खेतों में सिंचाई के लिए पानी मिलने लगा वहीं शहर व आसपास क्षेत्रों में जल स्तर भी ऊंचा हुआ।
10. जिला बनने के बाद भी खिलाडिय़ों को यहां विभिन्न खेलों के आयोजन के लिए पर्याप्त मैदान नहीं मिलता था। इसे देखते हुए जिला मुख्यालय पर खेल गांव का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। साथ ही जनजाति बालक और बालक बालिका खेल छात्रावास आदि खोले गए।
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10 बड़े विकास की दरकार
1. रेल लाइन से अछूते जिले प्रतापगढ़ को अब तक रेल नहीं मिल पाई है। जिले को रेल लाइन से जोडऩे को लेकर बाते खूब होती है, सर्वे की घोषणा भी हुई थी लेकिन अभी तक इस पर कार्य शुरू नहीं हो सका है। आने वाले समय में यदि जिला रेल मार्ग पर आता है तो यातायात की दृष्टि से देश की मुख्यधारा से जुड़ सकेगा। यहां व्यापार की प्रचुर संभावनाओं को तलाशा भी जा सकेगा और जिले के विकास को पंख भी लग सकेंगे।
2. प्रतापगढ़ शहर को जल्द ही बहुप्रतिक्षित बाईपास की सौगात भी अब तक नहीं मिल पाई है। अब कहीं जाकर सरकार की ओर से इसके लिए भूमि अवाप्ति सहित अन्य प्रक्रियाएं की जा रही है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है की सभी प्रक्रियाएं जल्द पूरी होकर बाईपास निर्माण का कार्य शुरू होकर जल्द पूरा होगा और शहरवासियों को बाईपास की सौगात मिल सकेगी। शहर को भारी वाहनों से निजात दिलाने के लिए करीब 11 किलोमीटर लम्बे बाईपास का निर्माण किया जाएगा।
3. प्रतापगढ़ जिला थेवा कला के लिए भी जाना चाहता है। देश व दुनिया में थेवा कला की अपनी अलग पहचान है। लेकिन इसके व्यावसायिक स्तर पर बढ़ावे के लिए आज तक कोई बड़ी योजना सरकार की ओर से नहीं बनाई गई है। अगर थेवा कला को राज्य व केन्द्र सरकार की ओर से प्रोत्साहन मिलता है तो यह जिले के विकास में काफी मददगार साबित हो सकता है।
4. जिले में प्रथम कन्या महाविद्यालय की मांग साल पुरजोर रही है। जनप्रतिनिधि आश्वासन जरुर देते हैं लेकिन कन्या महाविद्यालय की स्वीकृति नहीं मिल रही है। कन्या कॉलेज नहीं होने के कारण छात्राएं आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाती हैं। आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार की लड़कियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
5. जिला उद्योग धंधों के क्षेत्र में काफी पिछड़ा हुआ है। जबकि जिले में श्रमिक शक्ति पर्याप्त मात्रा में है। लेकिन यहां उद्योग नहीं होने से बड़ी संख्या में श्रमिकों को मजदूरी के लिए पलायन करना पड़ता है। उद्योग धंधे स्थापित होने से लोगों को रोजगार मिल सकेगा। साथ ही जिले की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो सकेगी।
6. लंबे समय से अधर में अटकी हवाई पट्टी की योजना भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। राज्य सरक ार की ओर से प्रतापगढ़ में हवाई पट्टी निर्माण की घोषणा के बाद से सभी को इसके पूरे होने का इंतजार है।
7. प्रदेश की प्रमुख थाती के साथ ही जैव विविधताओं को अपने आगोश में समेटे समृद्धशाली एवं प्रदेश में अपनी एक अलग ही पहचान रखने वाले जिले के सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य को पर्यटन के नक्शे पर मुख्य रूप से लाने के लिए इको टूरिज्म की दरकार है। इस दिशा में ठोस योजना बनाकर कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
8. सडक़ों की सुधरे हालत
शहरों सहित जिले के विभिन्न मार्गो की सडक़ों की हालत काफी खराब है। ऐसे में लोगों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लम्बे समय बाद एनएच 113 पर सडक़ बनी जिससे थोड़ी राहत मिली, मंदसौर सडक़ की भी लम्बे समय बाद सुध ली गई लेकिन अब भी अन्य सडक़ों के आमूलचूल सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।
9. जिले में यूं तो बिजली विभाग की ओर से कई योजनाएं शुरू की गई और कई नवाचारों के माध्यम से लोगों को बेहतर बिजली सुविधा देने का प्रयास किया गया लेकिन शहर सहित जिले के विभिन्न स्थानों पर अनियमित बिजली, ट्रांसफॉर्मरों की कमी, किसानों की दिन में बिजली देने की मांग, झूलते तारों से करंट के खतरा, खुले ट्रांसफॉमरों की समस्या आदि बनी रही जिनका निदान नहीं हो पाया।
10. अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी
जिला बनने के बाद से प्रतापगढ़ का कमोबेश हर सरकारी विभाग अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। जिसके चलते जहां सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहे हैं वहीं आमजन के काम होने में देरी होती है और उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। चिकित्सा, बिजली, पानी जैसे विभागों तक में स्टाफ की काफी कमी है। जिससे जिले की हालत उपखंड से भी बदतर लगती है। जिसका खामियाजा कहीं ना कहीं आमजन को उठाना पड़ता है।
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क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि व अन्य
1. हुआ है सर्वांगीण विकास
भाजपा सरकार की ओर से प्रतापगढ़ को जिला बनाया गया। जिला बनाने के बाद से भाजपा सरकार की ओर से इसके चहूमुंखी विकास के लिए कार्य किए जा रहे हैं। प्रतापगढ़ से विधायक और राज्य सरकार में मंत्री नंदलाल मीणा ने जिले के सर्वांगीण विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। सांसद होने के नाते मेंने भी जिले के विकास के लिए कवायद कर लोगों को सुविधाएं देने के लिए प्रयास किए।
सी पी जोशी, सांसद, चित्तौडगढ़़-प्रतापगढ़
2. अपेक्षित विकास नहीं
प्रतापगढ़ को जिला बने 10 वर्ष हो चुके हैं। इन 10 वर्षो में जिले का जितना विकास होना चाहिए था उतना विकास नहीं हो पाया है। मेरे सांसद होने और कांग्रेस शासन में विकास की जो प्रक्रिया शुरू की थी उसे भी अवरुद्ध कर दिया गया। क्षेत्र के विधायक के मंत्री होने के बावजूद उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। कांग्रेस सरकार आने पर इसकी भरपाई की जाएगी और प्रतापगढ़ में विकास को नए आयाम स्थापित किए जाएंगे।
गिरिजा व्यास, पूर्व सांसद, प्रतापगढ़-चित्तौडगढ़़
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3. विकास के हर संभव प्रयास
भाजपा सरकार में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के मंत्री नंदलाल मीणा के अथक प्रयासों से प्रतापगढ़ को जिले के रुप में सौगात मिली। तब से लेकर आज तक भाजपा सरकार की ओर से जिले के सर्वांगीण विकास के लिए हरसंभव प्रयास किए गए हैं। जिसके नतीजे सामने हैं और जिले ने विकास के नए आयाम छुए हैं। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रतापगढ़ जिला उपेक्षा का शिकार रहा है। जिसकी भरपाई विकास की गति तेज कर की जा रही है।
कमलेश डोसी, सभापति, नगरपरिषद, प्रतापगढ़
4. विकास की गति काफी धीमी
प्रतापगढ़ में विकास की गति काफी धीमी है। कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में यहां विकास की प्रक्रिया तेज की थी। जिले का आधारभूत ढांचा खड़ा किया था लेकिन उसके बाद आई भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में महज दिखावे के सिवा कुछ नहीं किया। ऐसे में जिस गति से विकास होना चाहिए था वह नहीं हुआ और जिला जिस गति से उन्नति करना चाहिए था वह नहीं कर पाया। जिसका खामियाजा कहीं ना कहीं यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है, लेकिन कांग्रेस सरकार आते ही इस कमी को पूरा किया जाएगा।
भानूप्रताप सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष, प्रतापगढ़
5. कुछ हुआ, कुछ बाकी
प्रतापगढ़ के जिला बनने के बाद यहां कई विकास के कार्य हुए हैं। मिनी सचिवालय कलक्ट्रेट सहित विभिन्न जिला स्तरीय विभाग खुलने से लोगों को सुविधा मिली है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी विभिन्न विकास कार्य होने से लोगों को सुविधाएं मिली है। हालांकि विकास की यह गति कुछ और तेज हो सकती थी और आगे भी हो सकती है। अस्पतालों सहित विभिन्न विभागों में अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी भी काफी खलती है। अभी सुधार और विकास की काफी गुंजाईश है।
डॉ धनेश सोनी, निजी चिकित्सक, प्रतापगढ़
6. बनी रहे विकास की निरंतरता
प्रतापगढ़ के जिला बनने के बाद यहां विकास की गंगा बही है। शहर में तो विकास हुआ ही है जो दिखता भी है लेकिन गांवों में भी विकास कार्य हुए हैं। जिसका लाभ ग्रामीणों को मिलने लगा है। बिजली-पानी-सडक़, परिवहन आदि सुविधाएं बढ़ी है। हालांकि अब भी कुछ कमियां हैं जिन्हें ठोस कार्ययोजनाएं बनाकर दूर किया जा सकता है। सुधार और विकास की संभावनाएं हमेशा ही बनी रहती है और इसकी निरंतरता बनी रहनी चाहिए।
के के पंचौली, सेवानिवृत्त शिक्षक
7. बढ़ रहा है जिला
प्रतापगढ़ के जिला बनने के बाद से जिले में विकास कार्य तो हो रहे हैं। जिससे लोगों को सुविधा मिल रही है। जिला अपने पूर्ण स्वरुप को प्राप्त कर रहा है। मिनी सचिवालय के रुप में जिले को बड़ी सौगात मिली है। जहां एक ही छत और एक ही परिसर में विभिन्न कार्यालय होने से लोगों को यहां-वहां भटकने से निजात मिली है। बिजली-पानी की उपलब्धता में भी बढ़ोतरी हुई है। सडक़ों का खस्ताहाल और परिवहन के साधनों की कमी परेशानी का विषय है। ये कमियां भी जल्द दूर होनी चाहिए।
दुर्गाशंकर सोलंकी, महामंत्री, पेंशनर्स समाज
8. बढ़े विकास की गति
प्रतापगढ़ को जिला बने दस वर्ष होने के बावजूद विकास की गति काफी धीमी ही रही है। औद्योगिक विकास नहीं होने से लोगों का पलायन हो रहा है और जिले का विकास भी अवरुद्ध हो रहा है। कृषि उपज मंडी की बात करें तो यहां का विकास अच्छा हुआ है।मंडी में दस वर्षो में 10 गुना आवक बढ़ी है। औद्योगिक विकास हो तो विकास को चार चांद लग जाएं।
शुभेन्द्र घीया, पूर्व अध्यक्ष, मंडी व्यापार मंडल
9. कुछ हुआ, कुछ बाकी
जिला बनने के बाद से विकास कार्य तो हो रहे हैं। लोगों को इन विकास कार्यो से सुविधाएं भी मिली है। मिनी सचिवालय खुला, सरकारी विभाग स्थापित हुए, जिससे लोगों को अपने कामकाज में आसानी रही। सडक़ों में और सुधार और परिवहन आदि की सुविधाओं को और ज्यादा बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। वहीं जिले में आवश्यक विविध आवश्यकताओं का विश्लेषण कर इनके लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर कार्य हो तो जिले के सर्वांगीण विकास को पंख लग सकते हैं।
गणपत लाल शर्मा, बार एसोसिएशन अध्यक्ष, प्रतापगढ़
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10. बही है विकास की गंगा
जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री नंदलाल मीणा के प्रयासों से ही प्रतापगढ़ ने जिले का स्वरुप लिया है। भाजपा शासन में प्रतापगढ़ के विकास के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। जिससे विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं। सांसद सी पी जोशी और मंत्री नंदलाल मीणा विकास के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं आगे भी विकास के कार्य किए जाते रहेंगे।
धनराज शर्मा, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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Published on:
24 Jan 2018 10:54 am
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