
बम्बोरी गांव में गवरी नृत्य का मंचन देखने के लिए उमड़ा जनसैलाब
बम्बोरी. यहां गांव में गवरी नृत्य का मंचन किया गया। गवरी नृत्य मेवाड़ का पारंपरिक लोकनृत्य है, यह भील जनजाति द्वारा किया जाता है। भील जनजाति भगवान शिव को अपना आराध्य मानते हैं और उनकी पत्नी पार्वती को गौरी मानती है। गौरी के नाम से ही इस नृत्य का नाम गवरी पड़ा है। यह नृत्य भाद्रपद कृष्ण की एकम से शुरू होता है। जो लगातार सवा महीने तक चलता है। सवा महीने तक भील जनजाति के लोग व्रत और उपवास रखते हैं। इस नृत्य का मंचन करते हैं।आयोजन: मेवाड़ का पारम्परिक लोकनृत्य
इस नृत्य में मुख्य पात्र राय बुढिय़ा, हथिया और वरजू कांजरी, लक्खी बंजारा, चोर, बालद, प्रेम सुखा, कानजी आदि होते हैं। यह जानकारी गोविन्द गुर्जर ने दी है। साथ ही बताया कि गवरी नृत्य देखने के लिए आसपास के गांव से काफी संख्या में ग्रामवासी पहुंचे। आयोजन देवनारायण मंदिर परिसर में किया गया।
सामूहिक सुंदरकांड का पाठ का हुआ आयोजन
बारावरदा. यहां गांव में सावन माह के चले लगातार चालीस दिनों तक सामूहिक सुंदरकांड का पाठ का आयोजन किया गया। सुंदरकांड पाठ में गांव के महिला-पुरुष व बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने सुंदरकांड पाठ की पुस्तक लेकर पाठ किए। पाठ के दौरान भगवान राम व हनुमान के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। सामूहिक पाठ के बाद भक्तिमय भजन प्रस्तुत किए गए।
श्री खाटुश्याम मंदिर का किया भूमि पूजन
छोटीसादड़ी. नगर के नीमच रोड़ शिव मंदिर के पीछे श्री खाटु धाम कॉलोनी में मंदिर का भूमि पूजन पङ्क्षडत कैलाशचंद्र उपाध्याय ने मंत्रोच्चार के साथ श्री श्याम मित्र मडंल की उपस्थिति में हुआ। श्री श्याम मित्र मंडल के कैलाशगिरि गोस्वामी ने बताया कि खाटू धाम कॉलोनी में निर्मित मंदिर का भूमि पूजन मनीषकुमार अग्रवाल, अशोक देवड़ा, रविकुमार सोनी, प्रवीण अग्रवाल और सदस्यों की मौजूदगी में किया गया। मुहूर्त के बाद सदस्य एवं कॉलोनीवासियों को बाबा को प्रसाद वितरण किया गया।
Published on:
26 Aug 2023 03:59 pm
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