
Discussion on the development of tribal society आदिवासी समाज के विकास पर हुई चर्चा
आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन का हुआ समापन
धरियावद.
आदिवासी एकता परिषद द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन का समापन रविवार को हुआ।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल रावत एवं प्रदेश अध्यक्ष मोगजी भाई भगोरा, स्वतंत्रता सेनानी महेशचंद्र कोटेड के सानिध्य में विविध कार्यक्रमों व प्रस्ताव के साथ हुआ। महासम्मेलन के अंतिम दिन संगठन सत्र कार्य नियोजन आदि कार्यक्रम आयोजित हुए। जिनमें एकता परिषद के पदाधिकारी द्वारा गुजरात में आगामी आयोजित कार्यक्रम रूपरेखा कार्यों आदि को लेकर चर्चा एवं प्रस्ताव लिए गए।
इसके अलावा संगठन सत्र के दौरान प्रमुख बड़ी भर्तियों आरएस, आरजेएस, आईएस, आईपीएस में टीएसपी जनजाति क्षेत्र में समाज के युवाओं को आरक्षण दिलवाना, समाज में शिक्षा का व्यापक प्रचार प्रसार, आदिवासी समाज में युवाओं की भागीदारी, आदिवासियों के हक अधिकार, प्रकृति संतुलन, पैसा एक्ट, ग्राम सभा, पांचवी अनुसूचि, महिला अधिकार आदि बिंदुओं पर खुली चर्चा हुई।
कार्य नियोजन के साथ तीन दिवसीय आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन का समापन हुआ। मीणा समाज सुधार संस्था अध्यक्ष केसूलाल मीणा ने बताया कि अंतिम दिन आदिवासी समाज के विकास, शिक्षा, पैसा एक्ट, ग्राम सभा, पांचवी अनुसूची, आदिवासी एकता के अलावा बड़ी प्रशासनिक भर्तियों में समाज के युवाओं को आरक्षण आदि बिंदुओं पर विभिन्न प्रस्ताव लिए गए। इस दौरान राज्य जनजाति आयोग के कीर्ति भील, जिला प्रमुख इंदिरादेवी मीणा, पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन का एकता परिषद के सदस्यों द्वारा स्वागत किया गया। महाविद्यालय बालक आश्रम छात्रावास अधीक्षक धनराज मीणा, देवपुरा सरपंच गेंदादेवी मीणा आदि का स्वागत किया गया।
तीन दिवसीय आयोजन में किया सहयोग
एकता परिषद द्वारा आयोजित तीन दिवसीय महासम्मेलन के आयोजन में एकता परिषद के पदाधिकारियों के अलावा धरियावद मीणा समाज सुधार संस्थान, आदिवासी परिवार, भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा, भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा, किसान संघ आदि संगठनों ने महासम्मेलन की विभिन्न कार्यों एवं व्यवस्था में सहयोग दिया।
महासम्मेलन में 14 राज्यों से पहुंचे थे आदिवासी
आदिवासी एकता परिषद की ओर से आयोजित महासम्मेलन में देश के प्रमुख 14 राज्यो केंद्र शासित प्रदेश से आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लिया। यहां देशभर के अलग-अलग राज्य के आदिवासी समाज ने एक दूसरे की परंपरा संस्कृति कला, रीति-रिवाज पहनावा आदि को करीब से देखा। आदिवासी संस्कृति कला प्राचीन सभ्यता के बारे में आपस में संवाद से रूबरू हुए कायम बाद उन्होंने देश में आदिवासी एकता का मजबूत संकल्प लिया गया।
Published on:
16 May 2022 08:05 am
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