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जागरूकता के अभाव में नई तकनीक से दूरी

उद्यान विभाग कर रहा प्रयास

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जागरूकता के अभाव में नई तकनीक से दूरी

जागरूकता के अभाव में नई तकनीक से दूरी


प्रतापगढ़. जिले में जागरूकता के अभाव में कई योजनाओं का लाभ किसान नहीं ले पाते है। इसी प्रकार से उद्यानिकी फसलों में खर्च में कमी और अधिक उत्पादन के लिए मङ्क्षल्चग योजना में भी किसानों का रुझान नहीं है। हालांकि उद्यान विभाग की ओर से इसके प्रचार-प्रसार के लिए किसानों से सम्पर्क किया जा रहा है। लेकिन मङ्क्षल्चग को लेकर अभी लक्ष्य के मुकाबले अब तक आवेदन नहीं आए है। इसे लेकर विभाग की ओर से सहायक कृषि अधिकारियों को किसानों को इस संबंध में पूरी जानकारी देने के लिए निर्देश दिए है। जिले में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मङ्क्षल्चग पर भी अनुदान देय है। इसके लिए प्रतापगढ़ जिले को उद्यान विभाग को मङ्क्षल्चग के लिए 120 हैक्टेयर का लक्ष्य दिया गया है। इसके मुकाबले अभी तक 20 हैक्टेयर में ही आवेदन आए है। लक्ष्य के अनुश्यप आवेदन कम होने से अब विभाग की ओर से इसके लिए प्रचार-प्रसार का जिम्मा अधीनस्थ कर्मचारियों को सौंपा गया है।
यह है प्लास्टिक मङ्क्षल्चग योजना
फसलों को सर्दी और गर्मी से बचाने और उत्पादन की लागत को कम करने के लिए मङ्क्षल्चग तकनीक कारगर है। खरपतवार और ङ्क्षसचाई जैसी समस्या से निजात पाने के लिए एक नई तकनीक विकसित की गई है। जिसका नाम है मङ्क्षल्चग विधि से खेती। इस विधि में बेड को प्लास्टिक से पूरी तरह कवर कर दिया जाता है, जिससे खेत में खरपतवार न हो। मङ्क्षल्चग से पानी की भी बचत होती है। इसके साथ ही इसमें खरपतवार, दवाइयों का खर्च भी कम आता है। मङ्क्षल्चग में मिर्च, टमाटर, बैंगन, खीरा, तरबजू, खरबजू, कद्दुवर्गीय फसलें उगाई जा समी है। मङ्क्षल्चग ऐसी तकनीक है, जिसमें खेत में लगे पौधों की जमीन को चारों तरफ से प्लास्टिक चादर से ढंका जाता है। इसके अंदर ही ड्रिप लगाई जाती है।
प्लास्टिक मङ्क्षल्चग पर अनुदान
उद्यान विभाग के सहायक कृषि अधिकारी किशनलाल और नंदकिशोर प्रजापत ने बताया कि मङ्क्षल्चग पर विभाग की ओर से अनुदान दिया जा रहा है। इसके तहत प्लास्टिक मल्च पर सामान्य को 50 प्रतिशत, लघु एवं सीमांत को 75 प्रतिशत अनुदान दो हैक्टेयर पर दिया जा रहा है।
मङ्क्षल्चग खेती से काफी फायदे
खेतों में मङ्क्षल्चग खेती से काफी फायदा होता है। इससे मिट्टी में नमी बरकरार रहती है। मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण नहीं होने पाता है। पौधों की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। खेत में मिट्टी के कटाव नहीं होता है।खरपतवार से बचाव होता है। पौधे लम्बे समय तक सुरक्षित रहते हैं। मङ्क्षल्चग भूमि को कठोर होने से बचाती है। पौधों की जड़ों का विकास अच्छी तरह होता है।
कर रहे हंै प्रयास, किसान कर सकते हैं आवेदन
जिले में प्लास्टिक मङ्क्षल्चग से खेती के लिए विभाग की ओर से लगातार प्रयास किया जा रहा है। जिले में सभी कर्मचारियों को इसका अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के लिए कहा गया है। हालांकि प्रतापगढ़ जिले में अभी आवेदन कम आ रहे है। लेकिन अब किसान जागरुक हो रहे है। किसानों से अपील है कि वे राज्य सरकार या उद्यानिकी विभाग से पंजीकृत फर्म से ही मङ्क्षल्चग खरीदें। जिससे अनुदान में कोई परेशानी नहीं हो।
रामपाल खटीक, उप निदेशक, उद्यान विभाग, प्रतापगढ़.