प्रतापगढ़. शहर में रंग तेरस पर रविवार को आदिवासी समुदाय की ओर से महा गेर नृत का आयोजन किया गया। जिसके तहत कई गांवों से आदिवासी युवक परम्परागत वेशभूषा में पहुंचे। आयोजन के तहत मोहनलाल सुखडिय़ा स्टेडियम में गेर नृत्य का आयोजन किया गया। वहीं गांधी चौराहे पर गेर नृत्य देखने के लोग उमड़े। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के रमेश मइड़ा ने बताया कि प्रतापगढ़ जिला आदिवासी बाहुल्य है। वहीं सभी समुदाय के लोग होली फसल उत्सव पर्व को मनाते हैं। होली फसल उत्सव पर्व से लगाकर रंग तेरस तक होली की उमंग और मस्ती रहती है।
रंग-बिरंगे परिधान में आदिवासी संस्कृति से सजे-संवरे युवक-युवतियों एवं बुजुर्गों ने सुखाडिय़ा स्टेडियम में अपनी संस्कृति का प्रदर्शन किया। आदिवासी परिवार द्वारा प्रतापगढ़ जिले के सभी ब्लॉकों में गेर नृत्य का कार्यक्रम आयोजित किया था। उसके बाद रविवार को शहर में आयोजन किया गया। गेर नृत्य के साथ ही आदिवासी अंचल में प्रचलित दागढ़ी नृत्य भी किया। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक मांगीलाल निनामा ने बताया कि बढ़ती आधुनिकता एवं शहरीकरण से आदिवासी संस्कृति भी प्रभावित हो रही है। लुप्त होती संस्कृति को बचाने की आवश्यकता है। इसमें भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा, भील प्रदेश युवा मोर्चा, भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा की प्रमुखता से भूमिका रही है।15 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के तहत आज प्रतापगढ़ के सुखाडिय़ा स्टेडियम में आयोजित किए गेर नृत्य में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिली।