
प्रतापगढ़. जिले के सर्वे में सरकार को लेकर ज्यादातर नकारात्मक बातें सामने आई। सर्वे में 55 फीसदी लोगों ने कहा की वे सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं है। करीब इतने ही फीसदी लोगों ने कहा की सरकार उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है और वे इसे पांच साल के लिए मौका नहीं देकर सरकार बदलने की राय रखते हैं।
सत्तारूढ़ पार्टी के बारे में भी जिले की जनता की कोई अच्छी राय नहीं रही। करीब 56 फीसदी लोगों को मानना है की भाजपा उनकी उम्मीदों के मुताबिक सरकार नहीं चला पाई। करीब 58 प्रतिशत लोग मानते हैं की भाजपा का अपनी सरकार पर पूरा नियंत्रण नहीं रहा। भाजपा की सरकार को कांग्रेस से बेहतर मानने वालों की संख्या भी 48 फीसदी ही रही। वहीं 47 फीसदी लोग ही भाजपा को पुन: सरकार बनाने का मौका देना चाहते हैं।
बात करें विपक्ष के रुप में कांग्रेस की भूमिका की तो कांग्रेस के बारे में भी राय कोई ज्यादा अच्छी नहीं पाई गई। करीब 55 प्रतिशत ने माना की कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में उनकी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई। 58 फीसदी ने माना की विपक्ष के रुप में कांग्रेस जनता के मुददों को लेकर सक्रिय नहीं रही। कांग्रेस को दुबारा सरकार बनाने का मौका देने वालों की संख्या भी 53 प्रतिशत के करीब ही रही। वहीं करीब इतने ही लोगों ने माना की कांग्रेस की सरकार भाजपा से बेहतर थी।
प्रदेश में सरकार के तीसरे विकल्प के बारे में जनता का कहना यह था की भाजपा व कांग्रेस शासन चलाने में उम्मीदों के अनुसार सफल तो नहीं रही लेकिन तीसरा मोर्चा लोगों के गले नहीं उतरा। लोगों ने सुधार के लिए गैर राजनीतिक लोगों को आगे आने पर जरुर बड़ी मुहर लगाई।
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मिजाज-ए-सियासत:पत्रिका समूह ने टटोली मतदाताओं की नब्ज, 58त्न सरकार बदलने के इरादे में
राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पत्रिका समूह के सर्वे में अहम सवाल पूछा मतदाताओं से, क्या आपकी राय में सरकार बदलनी चाहिए?
राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पत्रिका समूह के सर्वे में अहम सवाल पूछा मतदाताओं से, क्या आपकी राय में सरकार बदलनी चाहिए? राजस्थान में 62.59 फीसदी, मध्यप्रदेश में 54.97 फीसदी और छत्तीसगढ़ में 58.78 फीसदी का सीधा जवाब हां। यानी तीनों का औसत लगभग 58 फीसदी रहा।
तीन राज्यों के 45000 मतदाताओं से सीधे सवाल, सत्ता और प्रतिपक्ष के लिए आईना
कल उसी का है जो उसे आज सुन ले। कल की सियासी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। पारा चढऩे लगा है। पहले कर्नाटक। फिर कतार में हैं राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़। हिन्दी पट्टी के तीन अहम राज्य।क्या कहती है जनता। पत्रिका समूह ने नब्ज टटोली। तीनों राज्यों में लगभग 45 हजार मतदाताओं से सीधे सवाल।
आज चुनाव तो क्या हालात? सर्वे इसलिए, क्योंकि सरोकार है सीधे जनता से। सत्ता और प्रतिपक्ष के लिए आईना है। आंकड़ों में संदेश हैं। सरकार और उसकी कार्यप्रणाली सभी को प्रभावित करती है। अब बारी जनता की आने वाली है... क्योंकि जो है सो है।
राजस्थान के विधायकों के लिए है बड़ा संकेत
राजस्थान के विधायक जनता की उम्मीदों के पैमाने पर पिछड़ गए। छत्तीसगढ़ के विधायक काफी हद तक उम्मीदों पर उतर पाए। जनता ही असल में किंगमेकर होती है। इस पैमाने पर भी राजस्थान के विधायक पिछड़े तो मध्यप्रदेश के विधायकों ने अच्छा प्रदर्शन किया।
मध्यप्रदेश के विधायकों के लिए राहत भरे आंकड़े हैं। फिर चुनावी मैदान में उतरने की मंशा रखने वाले राजस्थान के मौजूद विधायकों के लिए खतरा।
छत्तीसगढ़ के मौजूदा विधायकों के लिए आंकड़े काफी हद तक राहत भरे साबित हो सकते हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान में चेतावनी।
वादे तो बड़े किए थे सरकारों ने लेकिन जनता नाखुश
सर्वे के आंकड़ों ने चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी है। सबसे ज्यादा राजस्थान के मतदाता मौजूदा सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। तमाम दावों के बावजूद भी राजस्थान की सरकार जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारें भी विफल।
इस मोर्चे पर भी राजस्थान सरकार के लिए पोल के नतीजे बड़े संकेत हैं। वैसे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी लोग सरकार बदलने के मूड में हैं। राजस्थान की सरकार को मतदाताओं ने लगभग खारिज ही कर दिया। आने वाले विधानसभा चुनावों में जनता ने उन्हें मौका नहीं देने की ठानी है।
56त्न का मौजूदा को ना
पत्रिका के ताजा सर्वे में 56 प्रतिशत से अधिक जनता आगामी विधानसभा चुनावों में मौजूदा विधायक को दोबारा वोट नहीं देना चाहती। केवल 43.99 प्रतिशत ही भरोसा जता रहे हैं। 44 प्रतिशत से अधिक ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें मौजूदा विधायक बर्दाश्त ही नहीं है, उसे बदला जाए।
जहां तक जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की बात है, करीब 55 प्रतिशत जनता की नजर में विधायक उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए। 53 प्रतिशत से अधिक जनता तो ये शिकायत कर रही है कि उनके विधायक जीतने के बाद सुख-दु:ख बांटने ही नहीं पहुंचे। यही वजह है 125 विधायक ऐसे हैं जिनको पुन: चुनाव मैदान में उतारा गया तो जनता साथ नहीं देगी।
तो होगी वापसी मुश्किल
विधायकों ने जल्द ही जनता का दिल जीतने का प्रयास नहीं किए तो पत्रिका के सर्वे के अनुसार राजस्थान के मौजूदा 125 विधायकों की विधानसभा में वापसी काफी मुश्किल ही लग रही है। इनमें 2013 में पहली बार जीतने वाले विधायकों की संख्या भी कम नहीं है।
जनता जनार्दन ही विधायकों का भाग्य तय करेगी और सर्वे के अनुसार जनता का मत यह है कि 68 विधायक मैदान से नहीं हटे तो मतपेटियों से उनके भाग्य में हार ही निकलने वाली है। लूणकरणसर, राजाखेड़ा और दातारामगढ़ के वरिष्ठ और वयोवृद्ध विधायक ऐसे हैं, जिनको जनता का आशीर्वाद आज भी प्राप्त है। इसके अलावा बहुत से विधायकों की विदाई भी जनता चाहती है।
Published on:
01 Apr 2018 12:10 pm
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