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मिश्रित खेती से दोहरा लाभ, बगीचों की तरफ बढ़ रहा रुझान

फसल के साथ बगीचों से बढने लगी आय

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मिश्रित खेती से दोहरा लाभ, बगीचों की तरफ बढ़ रहा रुझान

मिश्रित खेती से दोहरा लाभ, बगीचों की तरफ बढ़ रहा रुझान



प्रतापगढ़. कांठल की जलवायु विभिन्न फसलों के लिए उपयुक्त होने को देखते हुए किसानों का रुझान अब उद्यानिकी फसलों और बगीचों की ओर बढऩे लगा है। बगीचों की स्थापना की जा रही है। फसल के साथ बगीचों से आय होने से दोहरा लाभ मिल रहा है। ऐसे में किसान भी इसमें रुचि दिखा रहे है। गौरतलब है कि प्रतापगढ़ जिले में परम्परागत फसलों की बुवाई का चलन है। ऐसे में पिछले कुछ वर्षों से बगीचे लगाने की तरफ रुझान बढ़ा है। जिले में कई किसानों ने संतरा, अमरुद के बगीचे लगाए है। खेत में बगीचे की स्थापना से किसानों को दोहरा लाभ मिल रहा है। अमरुद, संतरा के पौधों के बीच में खाली पड़ी जगह में रबी और खरीफ की फसल की भी बुवाई की जाती है। ऐसे में बगीचे लगाने से अतिरिक्त आय भी मिल रही है।
जिले में इन स्थानों पर लगा रहे बगीचे
प्रतापगढ़ जिले में मानपुरा, बसाड़, अवलेश्वर, मोवाई, कोटड़ी, नौगांवा, लुपड़ी, चूपना, दलोट, सुबी, छोटीसादड़ी क्षेत्र, बड़ी साखथली, नीमच रोड पर पानमोड़ी, रठांजना, बरडिय़ा, समेत कई क्षेत्रों में बगीचों से किसानों को दोहरा लाभ मिल रहा है।
ड्रिप ङ्क्षसचाई पर अनुदान
बगीचे की स्थापना पर किसानों को विभाग की ओर से अनुसुचित जनजाति विभाग की ओर से ५० प्रतिशत की दर से अनुदान दिया जाता है। प्रति किसान को अधिकतम ४ हैक्टेयर तक बगीचे लगाने पर अनुदान दिया जाता है। इसमें बिना ड्रिप के इकाई लागत का ५० प्रतिशत या अधिकतम ३० हजार रुपए प्रति हैक्टेयर के आधार पर प्लांङ्क्षटग, मटेरियल, उर्वरक, पौध संरक्षण पर दिया जाता है। इसमें प्रथम वर्ष में कुल अनुदान का ६० प्रतिशत, दूसरे वर्ष में ७५ प्रतिशत और तीसरे वर्ष में ९० और पौधे जीवित रहने पर २० प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इसी प्रकार ड्रिप होने पर ४० प्रतिशत या ४० हजार रुपए प्रति हैक्टेयर के आधार अनुदान दिया जाता है। जिले में गत पांच वर्ष का आंकड़ा
वर्ष हैक्टेयर फल
२०१७-१८ ४० संतरा, अमरुद,
२०१८-१९ ३० संतरा, अमरुद,
२०१९-२० ३० संतरा, अमरुद,
२०२०-२१ ५२ संतरा, अमरुद, नींबू
२०२१-२२ १२० संतरा, अमरुद, नींबू, आंवला, अनार, आम
२०२२-२३ १२० संतरा, अमरुद, नींबू, अनार, आम
(आंकड़े उद्यान विभाग के अनुसार)
बगीचों के लिए बढ़ रहा रुझान
प्रतापगढ़. कांठल की भूमि और वातावरण कई फसलों और फलों के बगीचों के लिए अनुकूल है। इसे देखते हुए ही जिले में गत कई वर्षों से बगीचे लगे हुए है। इनमें प्रमुख रूप से संतरा और अमरूद है। वहीं गत वर्षों से आम, आंवला, अनार, नींबू के बगीचों को लेकर भी किसानों का रूझान बढ़ रहा है। ऐसे में उद्यान विभाग की ओर से भी अनुदान पर बगीचे की स्थापना कराई जा रही है। वहीं कई किसान अपने स्तर पर भी बगीचे लगा रहे हैं। बगीचों के प्रति रुझान बढऩे के कारण ही इस वर्ष उद्यान विभाग की ओर से इस वर्ष का लक्ष्य गत वर्ष के मुकाबले दोगुना तक किया गया है। जिससे किसानों को पारम्परिक फसलों के साथ बगीचों से नकदी फसल भी मिल सके।

बढ़ रहा है रुझान, विभाग की ओर से दिया जा रहा अनुदान
कांठल में पिछले कुछ वर्षों से परम्परागत फसलों के साथ बगीचों के प्रति भी किसानों को रुझान बढ़ रहा है। बगीचा लगाने से किसानों को दोहरा लाभ मिलता है। इसमें कुछ वर्षों तक परम्परागत फसल की बुवाई भी कर सकते है। अभी कई किसान रबी की फसल को समेटने में लगे हुए है। बगीचों से चार वर्ष तक अन्य फसलों का उत्पादन कर सकते है। विभिन्न प्रजातियों के लिए बगीचे लगाने के लिए अनुदान दिया जाता है। इसके लिए किसान उद्यान विभाग में सम्पर्क कर सकते है।
रामपाल खटीक, उप निदेशक, उद्यान विभाग, प्रतापगढ़