
संकटग्रस्त पेंगोलिन: अब कांठल के जंगल से विलुप्त होने के कगार पर
प्रतापगढ़/दलोट. कांठल के जंगज जहां जैव विविधता से भरपूर है। ऐेस में यहां कई प्रकार के पेड़-पौधे पाए जाते है। इसके साथ ही यहां कई वन्यजीव भी पाए जाते है। जो यहां की जैव विविधता को दर्शाते है। इसमें से लुप्तप्राय: स्तनधारी पेंगोलिन भी प्रमुख है। यहां जंगल में यह वन्यजीव पाया जाता है। यहां तीन वर्ष पहले भी वन विभाग ने मुखबिर की सूचना पर पेंगोलिन के शिकार करने वाले गिरोह को पकड़ा था। जिसमें पेंगोलिन के अवशेष भी बरामद किए थे। वहीं रविवार को जिले के दलोट कस्बे में घुस आए एक पेंगोलिन को रेस्क्यू किया गया। इसे अभी वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है। उपवन संरक्षक सुनीलकुमार ने बताया कि विलुप्त होने के कगार पर वन्यजीव पैंगोलिन रविवार को दलोट कस्बे में आ गया। पहली बार दलोट पंचायत समिति क्षेत्र में यह पैंगोलिन अपने शिकार की तलाश में वितरण करता हुआ नजर आया। जिसे देख ग्रामीणों में कौतूहल का विषय बना रहा। इसे रेसक्यूअर लवकुमार जैन ने अपनी ने अपनी टीम एवं विभाग के साथ मिलकर रेस्क्यू किया। वाइल्ड लाइफ एंड रेस्क्यू सोसाइटी के लवकुमार जैन ने बताया कि दलोट कस्बे के कालका माता मंदिर के पास एक विचित्र जानवर होने की सूचना मिली। जिस पर रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। जहां मशक्कत के बाद उसे रेस्क्यू कर बाहर निकाला। इसके बाद वन विभाग टीम को सुपुर्द किया।
रेस्क्यू के दौरान दलोट वनपाल रामनारायण डांगी, सहायक वनपाल गोवर्धन मीणा, टीम के सदस्य चेनिराम कुमावत, प्रकाश कुमावत आदि मौजूद रहे। सहायक वन संरक्षक दाराङ्क्षसह ने बताया कि जंगलों, नदी के धरातल के पेटों में भोजन की तलाश में विचरण करने वाला पैंगोलिन निशाचर जानवर की प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है। जो शिकारियों के शिकार से लुप्त हो रही प्रजाति है।
लुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल है पेंगोलिन
पेंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियमए 1972 अनुसूची प्रथम के गंभीर संकटग्रस्त सूचीबद्ध है। भारत में पैंगोलिन कम होने का कारण इसका शिकार प्रमुख है। इसके अवैध शिकार इसके विलुप्त होने के प्रमुख कारण हैं। ऐसा माना जाता है कि ये विश्व के ऐसे स्तनपायी हैं। जिनका बड़ी मात्रा में अवैध व्यापार किया जाता है।
दुनिया में आठ प्रजातियां
पैंगोलिन की दुनिया में 8 प्रजातियां होना बताया गया हैं। रंग भूरा होता है। सदियों पूर्व देश में इसकी संख्या भरमार थी। लेकिन अब इसकी प्रजातियां लुप्त होने के कागार पर है। जिसका मुख्य कारण शिकारियों का शिकार होना बताया गया। गौरतलब है कि पूर्व में प्रतापगढ़ जिले में तत्कालीन डीएफओ संग्राम ङ्क्षसह कटिहार के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए पेंगोलिन का तस्कर का गिरोह पकड़ा था।
Published on:
08 Mar 2023 02:10 pm
बड़ी खबरें
View Allप्रतापगढ़
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
