
बराबरी और समानता की भावना
बराबरी और समानता की भावना
प्रतापगढ़. पाक पवित्र रमजान मुबारक जहां अनेकों गुणों व सवाब से भरपूर है, वहीं रमजान हमें समानता एवं शिष्टाचार का भाव भी सिखाता है। रोजा हर एक मुसलमान के लिए अनिवार्य है इसलिए हर एक रोजेदार को अपने अन्य रोजेदार भाइयों के बीच बराबरी का एहसास होता है। वह उनके साथ रोजा रखता है और उनके साथ ही रोजा खोलता है। उसे सर्व इस्लामी एकता का अनुभव होता है और उसे जब भूख का एहसास होता है तो वह अपने भूखे और जरूरतमंद भाइयों के तकलीफ से रूबरू होता है और भविष्य में उनकी देख-रेख के लिए आगे आता है। रोजे के दौरान चुगली गाली, कामुक विचार आदि बुराइयों से मन, कर्म और वचन से दूर रहना होता है।
सबके लिए अनिवार्य है, सिर्फ इन्हें मिलती है छूट
इस्लाम के पांच फ र्ज अनिवार्य माने गए हैं यानी हर एक मुसलमान को उस पर ईमान रखना ही होगा। रोजा भी इनमें से एक है। इसे हर मुसलमान को करना जरूरी है। लेकिन इसमें भी कुछ लोगों को छूट मिली हुई है और वो भी कुछ शर्तों के साथ। बीमारी की हालात में, सफर के दौरान (यात्री), दूध पिलाने वाली महिला और अबोध बच्चे को इस माह में फ र्ज अदायगी से छूट मिली हुई है। लेकिन ये ध्यान रहे कि साल के आने वाले महीनों में उसकी कज़ा जरूरी है। यानि कि बाद के महीनों में वे रोजे रख सकते हैं।
सिखाता है शिष्टाचार
रमजान के पवित्र माह में रोजा रखने से नसों में खून का दबाव संतुलित रहता है। यह शाईस्ता या सभ्यता और शिष्टता प्रदान करता है। उपवास के दौरान रक्तचाप सामान्य रहने से भलाई सुव्यवस्थाए आज्ञापालन धैर्य और निरूस्वार्थता का अभ्यास भी होता है।
आलिम रफिकउल इस्लाम
इमाम मस्जिदे बिलाल
वाटरवक्र्स रोड, प्रतापगढ़
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मूंग की खेती, फायदे का सौदा
मनाया प्रक्षेत्र दिवस
प्रतापगढ़. कृषि विज्ञान केन्द की ओर से धरियावद के जवाहरनगर में जायद मूंग पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. योगश कन्नोजिया ने जायद मूंग की किस्म आईपीएम 02-03 विशेषता पर प्रकाश डालते हुए जायद मूंग के लिए बीज उपचार, बुवाई, सिंचाई, निराई-गुड़ाई व फसल संरक्षण के बारे में विस्तृृत रूप से बताया। डॉ. कन्नोजिया ने बताया कि यह किस्म कम समय लगभग 6 2-6 8 दिन में पक कर 10 से 11 क्ंिवटल प्रति हैक्टेयर उपज देती है। इसका दाना अन्य किस्मों की तुलना में मोटा होता है। डॉ. कन्नोजिया ने बताया ने बताया कि यह किस्म पीतशिरा मोजेक रोग के प्रति प्रतिरोधक है।
इस अवसर पर केन्द्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. बलवीरसिंह बधाला ने बताया की किसान उचित फसल चक्र अपनाएं। साथ ही फसल चक्र में दलहनी फसलों को प्राथमिकता दें। डॉ. बधाला ने बताया कि दलहनी फसलों को अन्य फसलों की तुलना कम पानी व कम पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। कार्यक्रम सहायक रमेशकुमार डामोर ने विश्वविद्यालय के कृषि कलेण्डर व अजोला की जानकारी दी। प्रगतिशील कृृषक सूरजमल मीणा के खेत पर जायद मूंग की उन्नत किस्म आई.पी.एम 02-03 पर आयोजित किया गया। जायद मूंग का उत्पादन अभी 1 से डेढ़ क्विंटल प्रति बीघा हैं। जबकि इस किस्म से लगभग 2-2.5 क्विंटल प्रति होने की संभावना हैं।
Published on:
27 May 2018 10:22 am
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