समस्या: मंडियों में भी कम होने लगी आवक
गत वर्ष के मुकाबले कई फसलों के भावों में कमी से किसान चिंता में
प्रतापगढ़. इस वर्ष मंडियों में पहुंच रही जिंसों के भावों में गत दिनों से लगातार कमी होती जा रही है। ऐसे में किसानों में मायूसी है। किसानों का कहना है कि भाव काफी कम है। जिससे मेहनत भी नहीं मिल पा रही है। इसी कारण गत दिनों से यहां आवक में भी कमी होने लगी है। इससे दोपहर तक ही यहां मंडी में नीलामी का कार्य पूरा हो जाता है। यहां हालात यह है कि कुछ जिंसों को छोडक़र अधिकांश उपज के भाव गत वर्ष की अपेक्षा कम मिल रहे है। जिससे किसानों में मायूसी है। जिले में गत वर्ष रबी और खरीफ फसलों में खराबा हो गया था। इससे उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। खरीफ में सोयाबीन के भावों में कमी से किसानों को मेहनत भी नहीं मिली। वहीं किसानों को कम दामों में ही सोयाबीन बेचनी पड़ी। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद रबी की फसल में भी ओलावृष्टि, बारिश और अंधड़ से नुकसान हुआ। गत माह तक मंडियों में आवक अधिक हो रही थी। लेकिन कुछ फसलों को छोड$कर अधिकांश फसलों के भाव कम मिल रहे है। ऐसे में अब यहां मंडियों में आवक में भी कमी हो गई है। हालांकि किसानों को अब भ्ीा आस है कि उपज के दाम बढ़ेंगे। इसे लेकर कुछ फसलें अभी घरों में रखी हुई है।
मंडियों में औसत भावों की स्थिति
जिले में अभी रबी फसलों के भाव स्थिर है। सौ-दो सौ रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल में कम या अधिक हो रहे है। अभी गैहूं के भाव दो से ढाई हजार रुपए, मक्का के १८ सौ से दो हजार, चना के साढ़े सवा चार से साढ़े हजार, मसूर के पांच हजार, सोयाबीन के साढ़े चार से पांच हजार, सरसों के चार से साढ़े चार हजार, अलसी के चार से सवा चार हजार, मैथी के पांच से ६ हजार, अजवाईन के १५ हजार, लहसुन के चार से नौ हजार, प्याज के एक हजार, धनिया के पांच से ६ हजार और जौ के १८ सौ से दो हजार रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल औसत भाव चल रहे है।
लहसुन में तेजी
गत दो वर्षों के मुकाबले इस वर्ष लहसुन के भावों में तेजी है। इस वर्ष लहसुन के भाव गत दिनों से लगातार बढ़ रहे है। अभी मंडियों में लहसुन के भाव चार हजार से दा हजार रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल तक बोले जा रहे है। लेकिन जिले में गत वर्ष के मुकाबले बुवाई कम हुई थी। ऐसे में बहुत कम किसानों के पास लहसुन है। अधिकांश किसानों ने लहसुन की उपज पहले ही बेच दी है।