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मौसम में उतार-चढ़ाव: काले सोने पर छाया रोगों का साया

उत्पादन पर होगा प्रतिकूल प्रभाव

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मौसम में उतार-चढ़ाव: काले सोने पर छाया रोगों का साया


अति संवेदनशील अफीम की फसल

प्रतापगढ़. जिले में हाल ही में मौसम में उतार-चढ़ाव अधिक होने लगा है। ऐसे में रबी की फसलों में रोगों से सिर उठाना शुरू कर दिया है। वहीं काला सोना कही जाने वाली अफीम की फसल में भी कई रोग हो गए है। ऐसे में किसानों की ङ्क्षचता बढ़ गई है। जबकि कई जगहों पर किसानों ने डोडों से चीरा लगाना शुरू कर दिया है। कई जगह आगामी सप्ताह से चीरा लगाया जाएगा। ऐसे में उत्पादन को लेकर किसान पशोपेश में है।
गौरतलब है कि जिले में गत दिनों से तापमान में एकाएक बदलाव होने लगा है। इसके साथ ही कांठल में काला सोना कही जाने वाली अफीम की फसल में विभिन्न रोग दिखाई देने लगे है। मौसम के हिसाब से अति संवेनशील फसल अफीम को लेकर किसानों की ङ्क्षचता बढ़ गई है। पहले किसानों ने जानवरों, पक्षियों से फसल की सुरक्षा पर काफी खर्च किया हुआ है। अब फसलों में रोग होने लगे है। इन दिनों अफीम की फसल में काली मस्सी का प्रभाव ज्यादा दिखने लगा है। अफीम फसल में काली मस्सी रोग आने से पौधों के पत्ते नीचे से पीले पड़ रहे हैं। इससे डोड़ों की बढ़त रुक गई है। वहीं दूसरी ओर मौसम परिवर्तन के साथ ही मोयले ने भी किसानों की ङ्क्षचता बढ़ा दी है।
अरनोद. क्षेत्र में इन दिनों मौसम में परिवर्तन हो रहा है। जिससे रबी की फसलों में बीमारियां बढ़ रही है। ऐेसे में किसानों में ङ्क्षचता बढ़ती जा रही है। किसानों ने बताया कि तीन दिन से तापमान में बदलाव के कारण पत्ते पीले पड़ रहे हैं। अरनोद के मुखिया राधेश्याम राठौर, किसान पन्नालाल धनगर, सत्यनारायण, अमृतलाल आदि ने बताया कि अफीम में रोग लगना शुरू हो गया है। अफीम की फसल को काली मस्सी व सफेद मस्सी से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिकों की ओर से सलाह दी जा रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र प्रभारी डॉ. योगेश कनोजिया ने बताया कि काली मस्सी रोग से बचाव के लिए एक लीटर पानी में 2 एमएल रीडोमील दवा का स्प्रे करें। तना फटने की शिकायत पर स्ट्रोप्टो साइक्लिन के साथ रीडोमील का स्प्रे किया जा सकता है। इसी प्रकार मोयले के प्रकोप से फसल को बचाने के लिए एक लीटर पानी में 1 से 2 मिली लीटर डायमीटो 8 का स्प्रे कर सकते है। बदलते मौसम ने बढ़ाई ङ्क्षचता
मौसम में हो रहे परिवर्तन के साथ ही अफीम किसानों की ङ्क्षचता बढ़ गई है। काली मस्सी का प्रकोप दिखने लगा है। वहीं अन्य फसलों के साथ ही मोयला भी फसल को चट करने में लगा है। विभिन्न रोगों के कारण अफीम पौधों के पत्ते पीले पड़ रहे है। जिससे अब अंतिम समय में डोडों की बढ़तवार पर विपरीत असर हो रहा है। इन दिनों अफीम के डोडो में चीरा लगाने का समय नजदीक आने के साथ ही पत्ते पीले पडऩे लग गए है।
जिले में साढ़े आठ हजार खेतों में लहलहा रही अफीम की फसल
जिले में इस वर्ष करीब साढ़े साठ हजार खेतों में अफीम की फसल लहलहा रही है। नारकोटिक्स विभाग की ओर से वर्ष 2022-23 के लिए कुल 8482 लाइसेंस वितरित किए गए है। इसके तहत जिले के प्रतापगढ़ खंड में 4 हजार 628 किसानों को लाइसेंस दिए गए है। इसमें से चीरा लगाने के किसानों की संख्या 3 हजार 426 है। जबकि सीपीएस पद्धति के तहत एक हजार 202 किसान है। छोटीसादड़ी खंड में कुल 3 हजार 854 किसानों को लाइसेंस दिए गए है। इसमें चीरा लगाने वाले किसानों की संख्या 3 हजार 290 है। जबकि सीपीएस पद्धति में 564 लाइसेंस है।