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वन सुरक्षा आवश्यक, नहीं तो कागजों में रह जाएगा वन

पर्यावरण में होगा बदलाव, बदल जाएगी जीवन शैली  

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वन सुरक्षा आवश्यक, नहीं तो कागजों में रह जाएगा वन

वन सुरक्षा आवश्यक, नहीं तो कागजों में रह जाएगा वन

प्रतापगढ़. जिले के वन क्षेत्र में गत वर्षों से हो रही कटाई को लेकर जहां वन विभाग ङ्क्षचतित है। वहीं पर्यावरणविदें में भी इसे लेकर ङ्क्षचता बढ़ती जा रही है। वन विभाग की ओर से वन को बचाने के लिए कई प्रयास कर रहा है। चाहे कटाई हो या अतिक्रमण हो। वन सम्पदा का नुकसान हो। सभी पहलुओं को लेकर सावचेत है। लेकिन वन माफिया वन को नष्ट करने पर तुले हुए है। वन क्षेत्र कम होने पर जहां पर्यावरण पर प्रभाव होगा। वहीं इसके दुष्परिणाम भी सामने आएंगे। इसे लेकर वन विभाग के साथ पर्यावरणप्रेमी भी साथ मिलकर कार्य करना होगा। जिसमें पेड़ो की कटाई कैसे रुक सकती है? इस पर कार्य किया जा सकता है। इसके साथ ही वन क्षेत्र का संवर्धन पर भी सामूहिक प्रयास किए जा सकते है।
इसके साथ ही जिले का सीतामाता अभयारण्य तो अपने आप में जैव विविधता को समेटे हुए है। यहां पेड़-पौधों के साथ कई जीवों का आशियाना भी है। जबकि कई जड़ी-बूटियों का खजाना भी है। ऐसे में गत वर्षों से यहां अवैध कटाई से कई औषधीय पौधे कम होतो जा रहे है।
संरक्षण के साथ संवर्धन भी आवश्यक
जिले का जंगल काफी समृद्धशाली है। लेकिन गत कुछ वर्षों से निजी स्वार्थों के लिए जंगल को खत्म कर रहे है। ऐसे में पर्यावरण भी प्रभावित होने लगा है। ऐसे में हमें वन विभाग के साथ मिलकर वन क्षेत्र का संरक्षण करना होगा। जिससे आगमाी वर्षों में हरियाली का आंकड़ा बढ़ सके। जिससे यहां की जैव विविधत फिर से अस्तित्व में आए।
मंगल मेहता, पर्यावरणविद्
औषधियों को खजाना
सीतामाता अभयारण्य कई औषधियों का खजाना है। इनमें से कई की पहचान अभी शेष है। इसके लिए विभाग के साथ आमजन को भी प्रयास करना होगा। इस प्रकार की औषधियों का संरक्षण व संवर्धन करना होगा। जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी भी इनके बहुपयोगी लाभ ले सके।
डॉ. किशोरचन्द पाठक, सेवानिवृत्त उप निदेशक,आयुर्वेद विभाग, प्रतापगढ़
बचाना होगा जंगल
जिले के जंगल विशेषकर सीतामाता अभयारण्य में कुछ वर्षों से पेड़ों की कटाई, अतिक्रमण काफी बढ़ गए हैं। इससे यहां का पर्यावरण प्रभावित होता जा रहा है। जिससे औषधीय पादप भी कम होते जा रहे हैं। इनका संरक्षण हो सके, इसके लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।
लक्ष्मणङ्क्षसह चिकलाड़, पर्यावरणविद्, प्रतापगढ़