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125 फीट गहरी गुफा में विराजमान हैं गंगेश्वर महादेव

प्रतापगढ़. प्रतापगढ़-चित्तौडग़ढ़़ की सीमा पर स्थित प्रकृति की गोद में १२५ फीट गुफा में विराजमान गंगेश्वर महादेव क्षेत्र में लोगों की आस्था का केन्द्र है। प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी उपखंड क्षेत्र के बंबोरी-रघुनाथपुरा में भगवान भूतनाथ श्मशान में 125 फीट गहरी गुफा में विराजित है। मान्यता है कि यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की हर […]

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प्रतापगढ़. प्रतापगढ़-चित्तौडग़ढ़़ की सीमा पर स्थित प्रकृति की गोद में १२५ फीट गुफा में विराजमान गंगेश्वर महादेव क्षेत्र में लोगों की आस्था का केन्द्र है। प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी उपखंड क्षेत्र के बंबोरी-रघुनाथपुरा में भगवान भूतनाथ श्मशान में 125 फीट गहरी गुफा में विराजित है। मान्यता है कि यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की हर मुराद पूरी होती है।
जानकारी के अनुसार यह मंदिर संवत 949 में निर्मित हुआ था। यानि यह मंदिर 1100 वर्ष से भी अधिक पुराना है। इस मंदिर में करीब 800 वर्ष से पूजा का उसरा नाथ समाज के पुजारी ही कर रहे हैं।
चित्तौडग़ढ़-प्रतापगढ़ जिले की सीमा पर गंगेश्वर महादेव स्थित है। सतह से करीब 125 फीट गहरी गुफा में महादेव विराजित हैं। गुफा की गहराई इतनी कि शिवलिंग तक पहुंचते-पहुंचते ऑक्सीजन लेवल घटने लगता है। तब सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऑक्सीजन लेवल जांचने के लिए यहां माचिस की तीलियां जलाई। यह जलते ही बुझ गई। जलती मोमबत्ती भी अंदर एक-दो सैकंड में बुझ जाती है। करीब 11०0 साल पुराना माने वाले इस स्थल की खासियत यह भी कि बरसात के दिनों में गुफा में पानी भर जाता है। तब दर्शन बंद हो जाते हैं। गुफा में भरा पानी करीब 8 किलोमीटर दूर बिनोता की बावड़ी में बने गोमुख से गिरता है। जो कि जमीन के अंदर इस गुफा से इंटर कनेक्ट है। कहा जाता है कि कुछ दशक पहले यहां शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले फूल और पूजा सामग्री बिनोता की बावड़ी में जाकर गिर जाते थे। हालांकि अब बीच में मिट्टी-पत्थर आने से संकरा हो गया है।
पत्थर की सीढिय़ां और रेलिंग
शिवलिंग की पूजा करने जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पत्थर की सीढिय़ां और रेलिंग भी बनाई गई हैं। बीच में करीब 10 फीट गहरा गड्ढा है। इसमें पानी भर जाने के मद्देनजर अंदर एक पुलिया भी बनाई गई है। मानसून सीजन की शुरुआत में ही गुफा की दीवारों से पानी रिसना शुरू हो जाता है।
एक दशक से हो रहा विकास
यहां वर्ष २०१४ से विकास कार्य हो रहे हैं। इस मंदिर का विकास बांसवाड़ा के मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की तर्ज पर किया जा रहा है। लगातार यहां विकास कार्य जारी है।