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सबसे अधिक प्रवेश प्रतापगढ़ संस्कृत महाविद्यालय में

संस्कृत में बढ़ रही रुचि: प्रदेश में इसी वर्ष खुले 20 नए महाविद्यालय

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सबसे अधिक प्रवेश प्रतापगढ़ संस्कृत महाविद्यालय में

सबसे अधिक प्रवेश प्रतापगढ़ संस्कृत महाविद्यालय में

प्रतापगढ़ में प्रथम वर्ष में करीब दो सौ प्रवेश
भवन निर्माण के लिए साढ़े चार करोड़ की स्वीकृति जारी
प्रतापगढ़. इसी सत्र में राज्य सरकार की ओर से यहां खुले राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय में प्रथम वर्ष में ही करीब दो सौ विद्यार्थियों ने प्रवेश ले लिया है। कांठल में संस्कृत में विशेष रुचि देखी गई है। प्रदेश में इसी सत्र में कुल 20 महाविद्यालय खोले गए थे। इनमें से सबसे अधिक प्रवेश प्रतापगढ़ महाविद्यालय में ही हुए है। इसे देखते हुए सरकार ने यहां महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए साढ़े चार करोड़ रुपए का बजट भी आवंटित कर दिया है। ऐसे में अब शीघ्र ही यहां पर भवन निर्माण हो सकेगा। जिससे जिले के और भी अधिक 12वीं पास युवाओं को संस्कृत पढऩे का मौका मिलेगा। गौरतलब है कि संस्कृत का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य के तहत राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में कुल 20 महाविद्यालय खोले गए थे। इसमें प्रतापगढ़ में भी एक महाविद्यालय की स्वीकृत हुई। जिला मुख्यालय पर अभी सही भवन के अभाव में निकटवर्ती मनोहरगढ़ स्थित राउमावि के खाली भवन में संचालित किया गया। इसमें प्रथम वर्ष में ही 195 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। यहां संस्कृत महाविद्यालय खुलने से जिले के विद्यार्थी संस्कृत में पारंगत हो सकेंगे। राज्य सरकार की बजट घोषणा सत्र 2023-24 के अनुसार प्रतापगढ़ में भी राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय स्वीकृत होकर संचालित हो रहा है।
प्रदेश के 20 में से दो जिलों में ही बजट आवंटित
यहां जिला संचालित संस्कृत महाविद्यालय के भवन के लिए राज्य सरकार की ओर से बजट का भी आवंटित किया गया है। इसमें विशेष बात यह है कि प्रदेश में खुले 20 महाविद्यालय में से केवल प्रतापगढ़ और सिरोही में महाविद्यालय भवन के लिए ही साढ़े चार-साढ़े चार करोड़़ रुपए की स्वीकृति हुई है। कॉलजे के अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी रामचन्द्र मोची ने बताया कि अभी महाविद्यालय में इसी सत्र में शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रवेश हुए है। यहां पाठ्यक्रम बीए लेवल का है। इसमें तीन वर्ष के बाद आचार्य के लिए प्रवेश के योग्य हो जाता है। आचार्य एमए लेवल की होगी। इसके साथ ही कोई शिक्षा शास्त्री करना चाहता है तो वह बीएड की डिग्री कहलाएगी।
संविदा आधार पर व्याख्याता
महाविद्यालय में अध्यापन के लिए गेस्ट फैकल्टी के तहत चार सहायक आचार्य लगाए गए है। जो ङ्क्षहददी, संस्कृत वाग्मय, सहित्य शास्त्र और व्याकरण शास्त्र विष का अध्यापन कराएंगे। प्राचार्य ने बताया कि संस्कृत कॉलेज में 160 सीटें साहित्य और व्याकरण वर्ग में निर्धारित है। लेकिन यहां संस्कृत के प्रति उत्साह को देखते हुए साहित्य वर्ग में दो वर्ग कराने के लिए निदेशायल, संस्कृत शिक्षा को लिया गया है।
अध्यापन कार्य शुरू, भवन निर्माण की प्रक्रिया जारी
मनोहरगढ़ में संस्कृत महाविद्यालय के प्रथम वर्ष में 195 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। यहां अध्यापन कार्य शुरू कर दिया गया है। नवीन भवन निर्माण के लिए सरकार ने साढ़े चार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए है। जिला प्रशासन द्वारा युजीसी के विनियमानुसार तीन हैक्टेयर भूमि आवंटित किए जाने की प्रक्रिया जारी की जाएगी। इसके बाद भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए प्रयास किए जा रहे है।
डॉ. रणजीत कुमार झा, प्राचार्य, राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय, प्रतापगढ़.