12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

खेरोट नरेगा कार्य स्थल पर छाया व पानी का अभाव

तेज गर्मी में कार्य कर रहे श्रमिक

3 min read
Google source verification
pratapgarh

खेरोट नरेगा कार्य स्थल पर छाया व पानी का अभाव

प्रतापगढ़. खेरोट ग्राम पंचायत में चल रहे नरेगा कार्य स्थलों पर ना तो छाया की ओर ना ही पानी की माकूल व्यवस्था है। नरेगा श्रमिकों ने बताया कि इस चिलचिलाती धूप में विश्राम के लिए नरेगा स्थल पर माकूल संसाधन उपलब्ध नहीं होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पानी की व्यवस्था नहीं होने से एक किलोमीटर दूर हैंडपम्प से पानी लाकर पीना पड़ रहा है। मनरेगा कार्य स्थल पर छाया, दवा व पानी व बच्चों के लिए पालने की व्यवस्था नहीं होने से मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी मनरेगा का समय सुबह 7 बजे से 2 बजे तक है। मनरेगा के तहत अधिकांश कार्य खुले में ही होते हैं। जिससे श्रमिकों को तेज धूप में काम करना पड़ रहा है। इसके चलते श्रमिकों पर लू और तापघात का खतरा बना हुआ है।
हड़ताल के कारण परेशानी
अभी नरेगा कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से छाया के लिए टेंट की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। हड़ताल बन्द होते ही टेंट उपलब्ध कराया जाएगा।
सहायक सचिव
कमला मीणा, ग्राम पंचायत खेरोट

करेंगे व्यवस्था
नरेगा श्रमिकों के पानी के लिए गत वर्ष ग्राम पंचायत में खेल मैदान पर हैंडपम्प लगवाने के प्रस्ताव लेकर संबंधित विभाग को भेजा था। जो अभी तक स्वीकृत नहीं हुआ है। जल्द ही स्वीकृति लाकर हैंडपम्प लगवाएंगे।
देवीलाल मीणा
सरंपच, ग्राम पंचायत खेरोट

================================================
रफ्तार पर नहीं लगाम, कैसे रुके हादसे
-एक नेशनल व एक स्टेट हाइवे पर मात्र एक इंटरसेप्टर
-जिले में एक और इंटरसेप्टर वाहन की जरूरत

स्पीड अधिक होने पर बने इतने चालान
वर्ष 2017- 257
वर्ष 2018- 50
1 लाख 22 हजार 800 रुपए जुर्माना राशि वसूली

यह है जिले की स्थिति
थाने - 15
चौकी - 15
नेशनल हाइवे - 1
स्टेट हाइवे - 1
इंटरसेप्टर वाहन - 1

यह होनी चाहिए वाहनों की गति
चौपहिया वाहन - 60
चौपहिया सवारी वाहन - 90
ट्रक-ट्रेलर - 40
बाइक - 40
तिपहिया वाहन - 30

पत्रिका एक्सक्लूसिव
प्रतापगढ़. जिले में एक नेशनल व एक स्टेट हाइवे गुजर रहा है।वहीं जिले में 15 पुलिस थाने और 15 पुलिस चौकी स्थापित है। लेकिन इन सबके बीच मात्र एक इंटरसेप्टर वाहन है। ऐसे में वाहनों की स्पीड पर लगाम लग पा रही है। एक इंटरसेप्टर है, उसका कार्य क्षेत्र जिला मुख्यालय ही है। ऐसे में इसका बाकी के 14 थाना क्षेत्रों में जाना संभव नहीं है। ऐसे में वाहनों की गति निर्धारित नहीं हो रही है। और आए दिन सडक़ हादसों में जानें जा रही हैं। बीते एक वर्ष में विभिन्न थानों क्षेत्रों में वाहनों की रफ्तार ने करीब दो दर्जन से अधिक लोगों की जाने ले ली हैं।

इंटरसेप्टर वाहन करता है यह कार्य
इंटरसेप्टर वाहन में लगी दूरबीन लगभग दो किलोमीटर दूर से आने वाले वाहनों की गति को कैमरे में कैद कर लेती है। नियम से ज्यादा गति होने पर चालान बनाने या वाहन को जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। इंटरसेप्टर वाहन में गति नापने के लिए दूरबीन, कैमरा, एलईडी आदि के साथ शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच के लिए ब्रीथ एनेलाइजर भी लगा हुआ है।

60 से अधिक गति से दौड़ रहे वाहन
क्षेत्र में ट्रक-ट्रेलर की स्पीड़ भले ही 40 किमी निर्धारित कर रखी हो, लेकिन ट्रक ड्राइवर 60 से अधिक स्पीड पर वाहन चला रहे हंै। वहीं बाइक व अन्य वाहन भी तय गति से अधिक स्पीड में वाहन दौड़ रहे है।

यहां बना रहता है ज्यादा खतरा
जिले के कई ब्लैक स्पॉट होने के बाद भी उन स्थानों पर स्पीड़ लिमिट की बोर्ड नहीं है। क्षेत्र के धमोतर भुतीयावाड़ा, धोलापानी घाटा, बांसवाड़ा रोड़, सुहागपुरा, पीपलखुंट, मंदसौर रोड पर मचलाना सहित कई ब्लैक स्पॉट स्थान है।

यातायात को मिलेगा फायदा
जिले में फिलहाल जिला मुख्यालय पर अभी एक इंटरसेप्टर वाहन है। हालांकि जिले में एक और वाहन अगर होता है तो इससे यातायात को बड़ा फायदा होगा। जिले में एक ओर वाहन के लिए प्रयास किए जा रहे है।
रतनलाल भार्गव, एएसपी प्रतापगढ़