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लिव इन रिलेशनशिप मानव जीवन के लिए खतरा

Live in relationship is a threat to human life

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लिव इन रिलेशनशिप मानव जीवन के लिए खतरा

लिव इन रिलेशनशिप मानव जीवन के लिए खतरा


प्रतापगढ़. नगर के गुमानजी मंदिर की भुवन भानु प्रवचन वाटिका में जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक सकल संघ द्वारा चातुर्मास का आयोजन जारी है। इसके अंतर्गत रविवारीय युवा जागरण शिविर का आयोजन किया गया।
जिसमें साध्वी ने कहा कि प्रेम और विश्वास की परिभाषा है। कहा कि इंसान को आज एक छोटे से ताले पर विश्वास है। मगर इंसान का इंसान के ऊपर विश्वास नहीं है। इसी कारण वर्तमान दौर में परिवार बिखर रहे हैं। साध्वी ने वर्तमान दौर में चल रहे अंग्रेजी कल्चर लिव इन रिलेशनशिप संबंधों को पशुओं की सभ्यता की संज्ञा देते हुए कहा कि इस कल्चर से समाज में विकृति पैदा हुई है। साध्वी ने अपने प्रवचनों में कहा कि पति-पत्नी के रिश्ते में समझदारी जरूरी है। उन्होंने नारी शक्ति को प्रबल बताते हुए कहा कि स्त्री हमेशा दूसरों के लिए जीती है। इसलिए स्त्री से उसकी उम्र नहीं पूछी जाती। हस्त मिलाप के बाद पत्नी पति के हाथों की रेखा बन जाती है। इसीलिए उसे किसी को हाथ दिखाने की जरूरत नहीं है। साध्वी ने कहां कि आज के दौर में संबंध प्रेम और विश्वास की कमी की वजह से टूट रहे हैं। इन संबंधों को बनाए रखने के लिए त्याग जरूरी है।
लगातार 2 घंटे के प्रवचन में प्रेम, विश्वास और बलिदान तथा पीड़ा के ऊपर अनेक उदाहरण देते हुए उपस्थित श्रावक एवं श्राविकाओं को जीवन में समझदारी से जीवन जीने की कला समझाई। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को पाश्चात्य संस्कृति से बचाए रखें। जन्मदिन, शादी की सालगिरह या 31 दिसंबर के दिन अपने आसपास की गौशाला जाएं या अपने आसपास झुग्गी झोपडिय़ों या निर्धन बस्तियों में ले जाकर उस महत्वपूर्ण दिवस को उनके बीच मनाएं। वहां जो खुशी आपको प्राप्त होगी वह शब्दों में बयां नहीं होगी। रविवार को ही संघ मे चल रहे 5 करोड़ नवकार जाप की पूर्णाहुति की गई।
समय रहते ही धर्म भी कमा लो
यहां रामद्वारा में चातुर्मास के तहत धर्मसभा का आयोजन हो रहा है। यहां कथा में संत शंभूराम ने कहा कि पांच कर्मेंद्रियां, पांच ज्ञानेंद्रियां और एक मन को नियंत्रण में रखना ही एकादशी है। महापुरुषों की वाणी अर्थात ग्रंथ, संत व समाज वर्तमान में मानव जीवन का कल्याण करते हैं। गुरुकृपा का तौल नहीं किया जा सकता है। जल, धरती, पवन, आकाश सभी में राम समाया हुआ है। राम में रकार व मकार ब्रह्म की महिमा है। सज्जन आदमी की महिमा का गुणगान पूरे नगर में किया जाता है। नाथ, दादू, कबीर, जैन, राममस्नेही कई विभिन्न शाखा भारतवर्ष में धर्म का प्रचार प्रसार करती है। धर्मगुरु व शास्त्र का अनुसरण करना चाहिए। अपने ग्रंथों को कपड़े के आवरण में रखना चाहिए। लोक जीवन को सुंदर बनाने का लक्ष्य होना चाहिए। हमें अपने आंसू केवल परमात्मा के लिए ही बनाना चाहिए। राम की उपासना पूरा ब्रह्मांड करता है। पतिव्रता नारी सूर्य को भी उदय होने से रोक सकती है। शरीर का भरोसा नहीं है। इसलिए समय रहते हैं व्यक्ति को धर्म कर पुण्य लाभ कमा लेना चाहिए।