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संगीतमय भागवत कथा का हो रहा आयोजन

संगीतमय भागवत कथा का हो रहा आयोजन

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pratapgarh

चुपना. गांव में चल रही आदर्श राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के पीछे संगीतमय भागवत कथा प्रीतम महाराज की ओर से कथा का वाचन किया जा रहा है। जिसमें राजा दक्ष ने शिव सती से बदला लेने के लिए अपने हवन में शिव सती को नहीं बुलाया व सती का हवन कुंड में जलकर भस्म हो जाना, सती की मांग का सिंदूर नहीं जलना। इसलिए भगवान ने कहा की जो नारी सत पर रहे उसके घर के चारों तरफ सुख शांति रहे। कथावाचक ने कहा है जिनका ज्यादा पुण्य होता है, उनके घर बेटी का जन्म होता है। कथा मे राजा दक्ष को जीवन दान सती का राजा हिमालय के पुनर्जन्म पार्वती के रुप मे माता पार्वती को शिव को प्रसन्न करना, शिव पार्वती का विवाह करने के प्रसंग सुुनाए गए।
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भागवत कथा में दिखावे के लिए नाचने वालों का हाल राम रहीम जैसा होता है: कथावाचक भीमा शंकर शास्त्री
छोटीसादड़ी. निंबाहेड़ा मार्ग स्थित गुरुकुल के पास गोकुलधाम सोसाइटी में चारभुजा मंदिर संघ के तत्वाधान में आयोजित सात दिवसीय भागवत ज्ञान गंगा कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथावाचक पंडित भीमाशंकर शास्त्री ने कहा कि जहर मुंह से प्रवेश कर जाता है, तो उसे उल्टी करके बाहर निकाला जा सकता है। लेकिन शब्दों का जहर कान में प्रवेश कर जाता है, तो उसे नहीं निकाला जा सकता है। यह जहर जीवन में घुल जाता है। दो भाइयों के बीच प्रेम और परिवार को समाप्त कर देता है। उन्होंने कथा के महत्व को बताते हुए कहा की कथा में अनुशासन सिखाए जाते हैं। कथा जागने के लिए है न कि नाचने के लिए। अपनी त्रुटियों को देख कर दूर करने का प्रयास है भागवत कथा। कथा में नृत्य करके त्रुटियां करने के लिए नहीं। कथा करने वाले व श्रवण करने वाले का कल्याण होता है। कथा में दिखावे के लिए नाचने वाले लोगों का हाल राम रहीम जैसा होता है। भारतीय संस्कृति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जो संस्कृति हमें मर्यादा सिखाती है। उसका अनुसरण करना हमारा कर्तव्य है। आज के युग में लोग पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण कर रहे हैं और अपने मार्ग से भटक रहे हैं। आज-कल रसोई घर को भोजनशाला या पाक शाला बोलने के बजाय किचन का प्रचलन चल गया है। इस पर उन्होंने कहा की जहां रस युक्त पदार्थ बनते हैं, उसे रसोई घर कहते हैं और जहां किच-किच करने का साधन बनता है, उसे किचन कहते हंै। कथा के दौरान बीच-बीच में धार्मिक भजनों की प्रस्तुतियां भी हुई। इस दौरान महिला पुरुष भावुक होकर भजनों पर लीन हो गए। कथा सुनने के लिए छोटीसादड़ी नगर सहित अचलपुरा सेमरड़ा, कारुंडा, बसेडा गागरोल, गोठड़ा, बरेखन, गोमाना, रामदेवजी नाराणी धामनिया, केसुन्दा बरवाड़ा सहित कई गांव के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष युवक-युवतियां पहुंच रहे हैं। कथा प्रारम्भ पूर्व प्रात: यज्ञ का आयोजन हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की ओर से आहुतियां दी गई। दूसरे दिन की कथा समाप्ति के बाद महाआरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित की गई।
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