प्रतापगढ़. जिले में एक तरफ तो प्री-मानसून ी बारिश होने लगी है। वहीं मानसून में अभ्ीा करीब एक पखवाड़े की देरी है। लेकिन वन विभाग की ओर से मानसून में बुवाई के लिए पौधे तैयार किए जाने लगे है। विभाग की ओर से इस वर्ष साढ़े सात लाख पौधे तैयार किए जा रहे है। जिसमें अधिक ऊंचाई वाले पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है। जिससे पौधों के जीवित रहने की संभावना अधिक होगी।
वन विभाग की ओर से मानसून के दौरान जंगल, विभिन्न सार्वजनिक स्थानों आदि पर पौधरोपण और वितरण के लिए नर्सरियों में पौधे तैयार किए जा रहे है। अधिकांश पौधे तैयार हो गए है। जबकि नर्सरियों में अभी और भी पौधे तैयार किए जा रहे है। वन विभाग की ओर से गत वर्षों तक कम ऊंचाई वाले पौधे ही तैयार किए जाते रहे है। ऐेसें में इनके रोपण के बाद सुरक्षा अधिक समय तक करनी होती है। कई बार ये पौधे खत्म हो जाते है। इस समस्या को देखते हुए वन विभाग की ओर से इस वर्ष अधिक ऊंचाई वाले पौधे की संख्या अधिक रखी है। जिससे मानसून के दौरान ही ये पौधे और भी अधिक ऊंचाई तक हो सके।
यहां तैयार किए गए पौधे
जिले में 6 रेंज में पौधे तैयार किए जा रहे है। इसमें धरियावद में कालकी मगरी, झामुड़ी, हगोरा, सांवलियाजी, करनागढ़, मोड़ीखेड़ा, कालकी माता, हंडिया खेरा, उबनला, लसाडिय़ा रेंज में धामनिया जागीर, भूतबडला, काबरा मंगरा, पीपलखूंट में माताजी वाला बड़ा, करमोड़ा, पूना पठार, प्रतापगढ़ में बरेड़ा, रामगढ़, काकरा घाटी, झांकर, खेेमपुरिया, तालाब खेड़ा, अचलपुरा, गंधेर, मोटी खेड़ी, छोटी सादड़ी में चंदाकुई, हांडिया खोरा, भैरव घाटी, संतोकपुरिया गोल मगरी, देवगढ़ में कुंदनिया, भेरूघाटी, सालरा पानी, रामदेवजी, लांबाघांटा कणजिया नर्सरियों में पौधे तैयार किए जा रहे है।जिले में रेंजवाइज पौधरोपण का लक्ष्य
रेंज पौधे
धरियावद 195506
लसाडिय़ा 40000
पीपलखूंट 235000
प्रतापगढ़ 210395
छोटीसादड़ी 250000
देवगढ़ 196575
कुल 750760
(आंकड़े वन विभाग के अनुसार)
अधिक मात्रा में जीवित रहते है ऊंचाई के पौधे
कम ऊंचाई वाले पौधों की तुलना में अधिक ऊंचाई वाले पौधों का जीवित रहने वालों का प्रतिशत अधिक रहता है। इसका कारण यह है कि इन पौधों की देख-भाल एक से दो वर्ष तक ही करनी होती है। इसके बाद ऊंचाई अधिक होने पर इनके मवेशियों द्वारा खत्म करने की संभावना काफी कम रहती है। इस कारण विभाग का भी अधिक ऊंचाई वाले पौधे लगाने पर अधिक फोकस है। विभाग की ओर से साढ़े सात लाख पौधे तैयार किए गए है।
सुनील कुमार, उपवन संरक्षक, प्रतापगढ़