
प्रतापगढ़ को जिला बने 11 साल हो गए, लेकिन शिक्षकों की सूची अब भी चित्तौडगढ़़ से ही
प्रतापगढ़. नया जिला बनने के बाद यह माना गया था कि इससे विकास कार्यों को गति मिलेगी, साथ ही कर्मचारियों और आम लोगों को भी लाभ होगा। क्योंकि उन्हें चित्तौडगढ़़ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, लेकिन नया जिला बनने से शिक्षकों की समस्या का समाधान नहीं हुआ, बल्कि उनकी समस्या बढ़ गई। वरिष्ठता सूची के बनाने में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही भी सामने आई है।
मामला तृतीय श्रेणी से द्वितीय श्रेणी में पदोन्नति वाले शिक्षकों की वरिष्ठता सूची से जुड़ा है। प्रतापगढ़ के शिक्षकों की वरिष्ठता सूची आज भी पुराने जिले केे अनुसार चित्तौडगढ़़ व प्रतापगढ़ को मिलाकर बन रही है। इससे प्रतापगढ़ के शिक्षक वरीयता में काफी पिछड़ रहे हैं।
यह है समस्या :राज्य सरकार ने टीएसपी (ट्राइबल सब प्लान) क्षेत्र का विस्तार तो कर दिया, इसके तहत प्रतापगढ़ को भी नया जिला बनाया गया। इसमें कुछ हिस्सा चित्तौडगढ़़ का शामिल है तो कुछ बांसवाड़ा। ऐसे में प्रतापगढ़ के शिक्षकों की वरिष्ठता सूची नए सिरे से बननी चाहिए थी, लेकिन यह आज भी चित्तौडगढ़़ जिला मुख्यालय से ही बन रही थी। ऐसे में सूची में प्रतापगढ़ के शिक्षकों को न्याय नहीं मिल रहा है।
कनिष्ठ को दे दिया प्रमोशन, वरिष्ठ रह गए: वरिष्ठता सूची के निर्माण में चित्तौडगढ़ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की भूमिका संदिग्ध नजर आती है। सूची में हर बार कुछ न कुछ त्रुटियां छोड़ दी जाती है। इसका नतीजा यह निकला है कि जूनियर शिक्षक पदोन्नति पा जाते हैं और पुराने शिक्षक पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के चित्तौडगढ़़ और प्रतापगढ़ कार्यालय में कुछ कर्मचारी जानबूझ कर वरिष्ठता सूची के निर्धारण के त्रुटियां करते हैं।
बाद में पीडि़त शिक्षकों को इन त्रुटियों को दूर करने में प्रतापगढ़, चित्तौडगढ़़ और उदयपुर तक के चक्कर लगाने पड़ जाते हैं। शिक्षक संगठनों का यह भी आरोप है कि अधिकारियों के संरक्षण के चलते इन कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
उदयपुर में संयुक्त निदेशक को दिया ज्ञापन
प्रतापगढ़. राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय की जिला इकाई के पदाधिकारियों ने वरिष्ठता सूची में विसंगति दूर करने की मांग को लेकर एक ज्ञापन उदयपुर में शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक भरत कुमार मेहता को दिया।
उपशाखा मंत्री जाकिर हुसैन ने बताया कि जिलाध्यक्ष बहादुर लाल मीणा के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में शिक्षकों को वरिष्ठता सूची में नाम दर्ज करवाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय चित्तौडगढ़़ के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई शिक्षकों का पात्रता होने के बावजूद वरिष्ठता सूची में नाम अंकित नहीं है। इस पर संयुक्त निदेशक ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने संभाग के समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को 10 अप्रेल को उदयपुर बुलाया है, जिसमें प्रतापगढ़ जिले की नई वरिष्ठता सूची तैयार की जाएगी तथा आश्वस्त किया कि पात्र सभी शिक्षकों का वरिष्ठता सूची में नामांकन किया जाएगा। उसके बाद की डीपीसी की जाएगी। इस अवसर पर पदाधिकारी देवी लाल मीणा तथा प्रभु लाल मीणा उपस्थित थे।
23 वर्ष की नौकरी में भी नहीं मिली पदोन्नति
प्रतापगढ़ जिले के बेड़मा में नियुक्त शिक्षक सत्यनारायण शर्मा शिक्षा विभाग लालाफीताशाही से सबसे ज्यादा पीडि़त हैं। उन्होंने बताया कि उनकी नियुक्ति 01 फरवरी 1996 में हुई, लेकिन वरिष्ठता सूची में हर बार इन्हें पीछे कर दिया जाता है। इसके चक्कर में इनसे वरिष्ठ पदोन्नत पा गए। विगत तीन साल से पात्र होने के बावजूद उनकी वरिष्ठता सूची में कभी विषय की त्रुटि कर दी जाती है तो कभी पिता के नाम में गड़बड़ी कर दी जाती है। पिछले दिनों शिक्षक शर्मा ने जिला कलक्टर श्यामसिंह राजपुरोहित को परिवेदना भी दी। इसके बाद प्रतापगढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी एक्शन में आए और चित्तौडगढ़़ के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सत्यनारायण शर्मा की वरिष्ठता सूची में संशोधन को लिखा, लेकिन आज तक वरिष्ठता सूची में कोई संशोधन नहीं हुआ।
इस बारे में आज उदयपुर में बैठक
&शिक्षकों की वरिष्ठता सूची को लेकर बुधवार को उदयपुर में संयुक्त निदेशक कार्यालय में बैठक है। इसमें प्रतापगढ़ जिले की सूचियां जो चित्तौडगढ़़, उदयपुर व बांसवाड़ा जिलों में है, वह ली जाएगी। इसके बाद जिले की पूरी वरिष्ठता सूची प्रतापगढ़ में ही तैयार की जाएगी।
डॉ शांतिलाल शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रतापगढ़
Published on:
10 Apr 2019 11:27 am
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