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महिला को महंगा पड़ा बलात्कार का झूठा मामला दर्ज कराना

प्रतापगढ़. धमोतर थाना क्षेत्र में बलात्कार का झूठा मामला दर्ज कराने पर एक महिला को एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि झूठा मामला दर्ज कराने पर पुलिस और अदालत का समय व श्रम बर्बाद हुआ है।

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महिला को महंगा पड़ा बलात्कार का झूठा मामला दर्ज कराना

महिला को महंगा पड़ा बलात्कार का झूठा मामला दर्ज कराना

प्रतापगढ़. धमोतर थाना क्षेत्र में बलात्कार का झूठा मामला दर्ज कराने पर एक महिला को एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि झूठा मामला दर्ज कराने पर पुलिस और अदालत का समय व श्रम बर्बाद हुआ है।

धमोतर थानाधिकारी मुंशी मोहम्मद ने बताया कि क्षेत्र के गांव पीपलीखेड़ा निवासी महिला सुगनी बाई ने गत वर्ष ५ मार्च को दो लोगों के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। इसकी जांच करने पर मामला झूठापाया गया। यहां तक कि महिला भी धारा १६४ के बयानों में अपने साथ हुई घटना की पुष्टि नहीं कर सकी। मौके के हालात और गवाहों से भी मामला साबित नहीं हुआ। जांच के बाद बलात्कार का आरोप पूरी तरह झूठा निकला।जांच में यह सामने आया कि जिन लोगों के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाया, उनसे महिला ने रुपए लिए थे। महिला का खेत और कथित आरोपियों के खेत आसपास है। वहां उनमें किसी बात को लेकर विवाद हो गया। बाद में आरोपियों ने महिला से उधार दिए रुपए को ताकीद की तो महिला ने उनके खिलाफ बलात्कार का झूठा मामला दर्ज करवा दिया। इस प्रकार झूठा मुकदमा दर्ज करवाकर पुलिस और कोर्ट का समय जाया करने पर थानाधिकारी ने प्रार्थीया के खिलाफ धारा 182/211 भादस में न्यायालय मे इस्तागासा पेश किया गया। इस पर अदालत ने महिला पर झूठा प्रकरण दर्ज करवा पुलिस व न्यायालय का समय बर्बाद करने से कार्रवाई करते हुए हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

गुण्डा एक्ट के तहत 4 आरोपी जिला बदर
प्रतापगढ़. जिले में समाजकंटक तत्वों की गतिविधियो पर अकुंष लगाने के उद्देश्य से चार आरोपियों को जिला कलक्टर ने जिला बदर करने का आदेश दिया है।

इस मामले में पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ डा. अमृता दुहन ने पत्र लिखकर जिला कलक्टर सौरभ स्वामी से कार्रवाई के लिए आग्रह किया था। इसके तहत राजस्थान गुण्डा नियत्रण अधिनियम 1975 की धारा 2 (ख) के अनुसार जो व्यक्ति बदमाशी वाले कार्यों में प्रवृत्त हो। अवैध रूप से जुआ सट्टा खेलने का आदि हो। ऐसे आरोपियों को जिले की सीमा से तीस दिन के लिए निष्कासित किया जाता है। इसके तहत छोटी सादड़ी के भूरालाल पिता छोगालाल रैगर को चित्तौडग़ढ़, मोहनदास पिता भंवरदास वैष्णव थाना हथुनिया को जिला चित्तोड़गढ़, कुलदीप पिता नन्दकिशोर मालवीय थाना प्रतापगढ को जिला बांसवाड़ा और वहीद खंान पिता कयुम खान थाना सालमगढ को जिला बांसवाडा भेजा गया।