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कावड़ यात्रा में गूजे शिव के जयकारे

सावन मास में हो रहे कई आयोजन

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कावड़ यात्रा में गूजे शिव के जयकारे

कावड़ यात्रा में गूजे शिव के जयकारे

प्रतापगढ़. सावन मास के पावन पर्व पर देवगढ़ दरवाजा बाहर स्थित बजरंगबली मंदिर से कावडय़ात्रा निकाली गई। जिसमें महिलाएं सुबह ढोल-धमाकों की थाप पर नृत्य करते हुए चल रही थी। ध्वजा पताका लहराते हुए बजरंगबली मंदिर से श्री गौरी सोमनाथ महादेव मंदिर पहुंची। कावड़ यात्रा का पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। कावड़ यात्रा के श्री गौरी सोमनाथ महादेव मंदिर पहुंचने पर मंत्रोचार के साथ अभिषेक कर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। सावन मास के पावन पर्व पर शहर के शिवालयों सहित श्री गौरी सोमनाथ महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक के पाठ किए गए। भक्त परिवार नंदकिशोर लोहार ने बताया कि यहां रुद्राभिषक किए गए। महादेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ओमप्रकाश ओझा ने बताया की यह आयोजन पिछले 5 वर्षों से आयोजित होता आ रहा है। पूरे सावन मास में अलग.अलग भक्तों द्वारा अभिषेक किया जा रहा है। वहीं 31 अगस्त को इसका समापन होगा। मंदिर के पुजारी पंडित आशीष जोशी के सानिध्य में 11 विद्वान पंडितों के द्वारा मंत्रोचार के साथ विधि विधान पूर्वक किया जा रहा है।
भागवत पौथी के साथ पूरे गांव में निकाली शोभायात्रा
चूपना. निकटवर्ती फरेडी गांव के रामजानकी मन्दिर पर चल रही भागवत कथा के सातवें दिन कथा वाचक राजेन्द्र व्यास रायला ने विभिन्न प्रसंग सुनाए। उन्होंने कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया। जिसमें बताया कि मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर वापस देना, सुभद्रा हरण का आख्यान किया। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए पुष्पा बहन जोशी ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए। यह भगवान श्री कृष्ण और सुदामा से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से सखा सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढऩे लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण मित्र हैं, इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना, प्रभु सुदामा-सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया। दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज ङ्क्षसहासन पर बैठाया हुआ। उन्हें कुबेर का धन देकर माला-माल कर दिया। जब जब भी भक्तों पर विपदा आ पड़ी है। प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं। गांव के लक्ष्मणलाल डांगी ने बताया कि रामजानकी मन्दिर पर चल रही सात दिवसीय कथा संपन्न हुई। उसके बाद पूरे गांव में भागवत पौथी के साथ पूरे गांव में शोभायात्रा निकाली गई। जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्प ओर माला नारियल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की और महा प्रसादी का आयोजन हुआ।