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कहीं जर्जर भवन तो कहीं शिक्षकों का टोटा

Somewhere a dilapidated building and somewhere teachers' tota

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कहीं जर्जर भवन तो कहीं शिक्षकों का टोटा

कहीं जर्जर भवन तो कहीं शिक्षकों का टोटा


बारिश में कक्षाओं में भर जाता पानी
प्रतापगढ़. जिले में कई विद्यालय आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए मोहताज हैं तो कई विद्यालय शिक्षकों की कमी हैं। ऐसे में शिक्षा का स्तर को लेकर संशय होना लाजमी है। राज्य सरकार द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही हैं। लेकिन व्यवस्था सुलभ नहीं हैं। चाहे प्राथमिक विद्यालय हो या माध्यमिक विद्यालय हो। अधिकांश विद्यालयों में हालत खराब है।
पारसोला. क्षेत्र के उदयपुर की जिले की सीमा से लगा ग्राम पंचायत लोहागढ़ बसा हुआ है। गांव में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में मूलभूत सुविधाएं तो उपलब्ध है। लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। यहां 10 कक्षा कक्ष का एक नया भवन भी लोहागढ़ पुलिस चौकी के पीछे बना हुआ है। मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। पुराने भवन में कक्षा पहली से छठी व नए भवन में कक्षा सातवीं से बारहवीं तक संचालित हो रही हैं। छात्र छात्राओं के लिए फर्नीचर, शुद्ध पेयजल, छात्र-छात्राओं के अलग अलग स्वच्छ शौचालय, खेल मैदान, कंप्यूटर कक्ष, प्रोजेक्टर एलईडी, विज्ञान प्रयोगशाला आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से परेशानी हो रही हैं।
बारावरदा. कुलमीपुरा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की हलात काफी खराब हो चुकी है। यहां हालात यह है कि भवन जर्जर हो चुका है। इससे छत से पानी टपकता है। दीवारों में भी दरारें हो चुकी है। यहां पहली से पांचवी तक के बच्चों की संख्या 29 है। जबकि यहां दो अध्यापक कार्यरत है। गांव के राहुल माली और ग्रामीणों ने बताया कि यहां बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है। ऐसें में यहां कमरों में पानी भरा हुआ है। इससे बच्चों के बैठने की जगह नहीं है।
कुलमीपुरा विद्यालय भवन की हालत खराब
भवन की हालत यह है कि भवन में कई जगह गड्ढे पड़े हुए हैं। ऊपर छत लटक रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां से स्कूल को बड़े स्कूल में शिफ्ट कर दिया जाए। जिससे बच्चों पर खतरा नहीं रहेगा। स्कूल के कमरों के अंदर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हुई है। इनमें कई जहरीले जीव देखे जा सकते है। यहां अभी बच्चों को स्कूल से बाहर बरामदे में बैठाया जाता है।
कराएंगे व्यवस्था
यहां उच्च माध्यमिक स्कूल में कमरों की कमी है। जो प्राइमरी स्कूल है। उसमें 29 बच्चे की संख्या है। बरसात में हो रही समस्या के लिए उच्च अधिकारियों अवगत करा दिया है। बरसात के बाद वहां स्कूल में छत को दुरुस्त करवाया जाएगा और कलर भी कराया जाएगा।
अजय अग्रवाल, प्रधानाचार्य, राउमावि, कुलमीपुरा

छत से टपकता पानी, गिरने लगा प्लास्टर
पीपलखूंट. क्षेत्र के मोरवानिया ग्राम पंचायत के तलाईया पाडा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की हालत काफी खराब हो गई है। यहां भवन जर्जर हो चुका है। जबकि इस विद्यालय में अभी 235 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत है। लेकिन विद्यालय भवन की हालत काफी खराब है। इस विद्यालय में सभी कमरे में छत से प्लास्टर गिरने लगा है। वहीं छत से पानी टपक रहा है। एक भी कमरा सही नहीं है। यहां बैठने की काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने कई बार सरपंच एवं प्रधान को अवगत कराया। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। बताया कि यहां वर्तमान में कुल 8 कमरे है। ग्रामीणों ने बताया कि इन कमरों की मर मत आवश्यक है। गांव के रामलाल निनामा ने बताया कि इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है।

लोहागढ़ विद्यालय की स्थिति
आज़ादी के समय में लोहागढ़ गांव में 1955-56 में पहली बार विद्यालय खुला। 1986 में उच्च प्राथमिक और 2010 में माध्यमिक और 2012 में उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत हुआ। इस विद्यालय में कला संकाय नहीं है। विज्ञान संकाय खुला है। जिसमें भौतिक शास्त्र, जीव विज्ञान, गणित विषय है। विद्यालय में कुल 590 छात्र छात्राओं का नामंकन हैं । विद्यालय में प्रधानाचार्य सहित कुल 28 पद स्वीकृत हैं। जिसमे से आधे 14 पद रिक्त पड़े हुए हैं। विद्यालय में तीन व्याख्याता के साथ लेब सहायक, पुस्तकालय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और लिपिक के पद भी रिक्त होने से विद्यालय में साफ-सफाई की तो लिपिक के अभाव में कार्यालय कार्य में भी परेशानी होती हैं। स्टाफ की कमी
विद्यालय में मूलभूत सुविधाएं हैं, लेकिन पर्याप्त स्टाफ नहीं है। एक कमरा जर्जर ं है। नया भवन सडक़ किनारे हैं। दुर्घटना का डर और चारदीवारी नहीं होने से मवेशी आते रहते हैं। जिससे पढ़ाई बाधित होती हैं।
बाबूलाल थाकरिया, प्रधानाचार्य, राउमावि लोहागढ़