
कहीं मौसम से खराबा तो कहीं हरे डोड़े चोरी होने की सता रही चिंता
अति संवेदनशील अफीम की फसल पर मंडरा रहे संकट के बादल
प्रतापगढ़. गत वर्षों से अफीम फसल का उत्पादन किसानों के लिए परेशानी वाला साबित होने लगा है। एक तरफ तो मौसम की मार और दूसरी तरफ डोडे चोरी की घटनाएं बढ़ती जा रही है। जिससे औसत पर भी संशय होने लगा है। ऐेसे में अफीम की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे है। जिससे किसानों की ङ्क्षचता भी बढ़ती जा रही है।
गौरतलब है कि कांठल की धरा कई फसलों के लिए अनुकूल है। इसके साथ ही यहां काले सोने की खेती भी की जा रही है। गत वर्षों से पर्यावरण प्रभावित होने का असर अफीम की खेती पर भी होने लगा है। वहीं प्रकृति की मार भी पडऩे लगी है। जिससे अफीम उत्पादन पर असर पडऩे लगा है। गत वर्षों से बेमौसम बारिश से काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही हरे डोडे चोरी होने का भी खतरा बढ़ गया है। जिससे निर्धारित मात्रा में सरकार को अफीम देने की औसत पर संशय बढ़ रहा है। इसे देखते हुए किसान भी अपने स्तर पर प्रयास कर रहे है। गत वर्षों से किसानों ने अफीम की सुरक्षा के विभिन्न जतन शुरू किए है। लुवाई-चिराई पूरी होने तक खेतों पर ही आशियाना बना रहे है। इसके साथ बारिश से डोडों से निकले दूध की सुरक्षा के लिए कई खेतों में डिस्पोजल भी लगा रहे है। हालांकि अंधड़ के दौरान यह डिस्पोजल हवा में उड़ जाते है। लेकिन कम हवा के दौरान बारिश से अफीम के दूध की सुरक्षा होती है।
कनाड़. गत दिनों से क्षेत्र में मौसम में काफी उतार-चढ़ाव हो रहा है। इससे फसलों में नुकसान होने लगा है। गत दिनों बारिश के कारण कई खेतों में अफीम की फसल को भी नुकसान हो रहा है। बारिश से डोडों से निकले दूध को धुलने से बचाने का जतन किया जा रहा है। किसानों ने इसके लिए डोडों पर डिस्पोजल लगाने का जतन किया है। जिससे बारिश से अफीम के दूध धुलने की समस्या से राहत मिल सके।
दलोट. क्षेत्र में इन दिनों अफीम की फसल पर लुवाई-चिराई का कार्य पूर्ण होने को है। हालांकि कई खेतों में अभी लुवाई-चिराई का कार्य चल रहा है। जिससे किसानों को अफीम खेतों की सुरक्षा करनी पड़ रही है। इसके लिए किसानों ने फसल पर प्लास्टिक की जाली लगा रखी है। कई खेतों में अब डोडे सूखने लगे है।
जिले में साढ़े आठ हजार खेतों में अफीम की पैदावार
जिले में इस वर्ष करीब साढ़े साठ हजार खेतों में अफीम की फसल लहलहा रही है। नारकोटिक्स विभाग की ओर से वर्ष 2022-23 के लिए कुल 8482 लाइसेंस वितरित किए गए है। इसके तहत जिले के प्रतापगढ़ खंड में 4 हजार 628 किसानों को लाइसेंस दिए गए है। इसमें से चीरा लगाने के किसानों की संख्या 3 हजार 426 है। जबकि सीपीएस पद्धति के तहत एक हजार 202 किसान है। छोटीसादड़ी खंड में कुल 3 हजार 854 किसानों को लाइसेंस दिए गए है। इसमें चीरा लगाने वाले किसानों की संख्या 3 हजार 290 है। जबकि सीपीएस पद्धति में 564 लाइसेंस है।
Published on:
11 Mar 2023 08:08 am
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